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राजनीतिक भंडारे में लंगर के मजे

उर्मिल कुमार थपलियाल First Published:17-03-2017 10:03:09 PMLast Updated:17-03-2017 10:03:09 PM

अब चुनावों के बाद चहुंदेश में जैसे रैन हो गई है और गोरी ने अपने मुख पर केश डाल दिए हैं। हारे हुए नेताओं के यही विचार हैं। वे अपनी सूनी कोठियों में चले गए हैं, जैसे खुद अपना अंतिम संस्कार करके आ रहे हों। कुछ ने तो आईने के सामने अपना माथा पीटना शुरू कर दिया है। कोई रो-रोकर कह रहा है कि दिल के अरमां आंसुओं में बह गए। अब उन्हें कौन समझाए कि अरमां तो आंसुओं में ही बहेंगे, वे गंगाजल में नहीं बहाए जाते। ईवीएम गालियां खा रही हैं और जीतने वाले दुहत्थड़ मारकरहंस रहे हैं।

अगर चेहरा काला हो, तो जरूरी नहीं कि आप हारने वालों में हों। शपथ ग्रहण समारोहों में कुछ नेताओं को तो शपथ रटी हुई है। नए नेता अभी हकला रहे हैं। हमारे उत्तर प्रदेश में तो हाथी दुबले हो गए हैं। साइकिल सवार पैदल हैं। लखनऊ में सुना है कि मेट्रो बंद हो जाएगी। अब सीधे बुलेट ट्रेन चलेगी। राष्ट्रभक्त अब देशभक्तों को डेली वेजेज पर रखेंगे। नलों से छांछ और लस्सी सप्लाई की जाएगी। दूध-दही के लिए गंगा-जमना तो हैं ही। लोग नालियों से घी बटोरेंगे। राज्य में अब शराब को सोमरस कहा जाएगा। हाथी में पंप से हवा भरने का तो प्रश्न ही नहीं उठता। अंधा भी अगर सपना देखे, तो कोई अपराध नहीं है।

ये चुनाव तो अश्वमेध यज्ञ था। अब कहीं लव-कुश नहीं होते। होते, तब भी घोड़ा नहीं रोकते। जरूरी नहीं कि जहां खंबे गड़े हों, वहां बिजली भी हो। जमानत बच जाने से हार की पीड़ा कम नहीं हो जाती। जीतने वाले नेता के यहां भीड़ अब लगी है। नेता बोले- भाइयो, गरमी बढ़ रही है। क्या पिओगे? भीड़ बोली- कुछ ठंडा पिला दो साहब। नेताजी ने बियर बंटवा दी।

कौन नहीं जानता कि जब बिना नहाए-धोए व्यवस्था कपड़े बदल लेती है, तो उसे नई सरकार कहा जाता है। नई लंका के नए रावण के नए दरबार में एक मुखबिर आया और बोला- नया पंगा मत लीजिए राजन। नए अंगद के नए पांव में अब भी नया दम है।
नए रावण ने सारे ईवीएम जमीन पर पटक दिए।

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