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अल्प साधनों के साथ

चौपड़ के खेल में एक कहावत हमेशा कही जाती है- जरूरी नहीं है कि सभी पासे आपके पास हों। बस जो हैं, उनका सही प्रयोग करना आपको आना चाहिए। जीवन के लिए भी यही सत्य है। आप विकट से विकट हालात से उबर सकते हैं, बस आपको अपने हाथ-पैर का सही प्रयोग करना आना चाहिए। हमारे शास्त्रों में गृत्समद नामक एक मुनि का जिक्र है। उन्होंने एक बहुत ही अच्छी पंक्ति लिखी है, जिसका मतलब है- ‘हर एक व्यवहार में विजय भाव रखिए।’ ऐसा हो गया, तो सही मायने में आप चक्रवर्ती हैं। व्यवहार में विजय भाव रखने का मतलब यह है कि आप जो कर रहे हैं, वह सर्वोत्तम तरीके से हो रहा है। भले ही साधन सीमित हैं, पर आप अपने काम को पूरे मनोयोग से कर रहे हैं। 

साधन का रोना अक्सर वही लोग रोते हैं, जो अपने साधनों के प्रति लापरवाह होते हैं। वे किसी चीज को तोड़ने के लिए औजारों का रोना रोते हैं, जबकि उनके ईद-गिर्द पत्थर बिखरे होते हैं। चार्ली चैप्लिन का बचपन घोर गरीबी में बीता। मां पागलखाने में थीं, पिता लापरवाह थे और विमाता प्रताड़ित करने वाली थीं। मगर चार्ली ने सारी विपरीत परिस्थितियों को औजार बनाया और दुनिया को दिखाया कि मुफलिसी और बेफिक्री में भी खुश रहा जा सकता है। उनकी पहली बोलती फिल्म द ग्रेट डिक्टेटर  का एक संवाद है- ‘देखो हैना! इंसानी रुह को पंख लग गए हैं और आखिरकार उसने उड़ान भरना शुरू कर दिया है। वह उड़ रहा है। महान भविष्य की ओर, जो कि तुम्हारा है। मेरा है और सबका है।’ वह अपने अल्प साधनों के साथ बेहतर भविष्य का स्वप्न देखते रहे और उसे पूरा भी करते रहे।

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  • Web Title:with little means