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मजबूत नेता के मायने

पिछले 25-30 वर्षों में राज्य की लोक-कल्याणकारी क्षमता बेतरह घटी है, चाहे सरकार किसी की भी रही हो। मुझ पर विश्वास नहीं है, तो गुजरात जैसे राज्यों में शिक्षा और स्वास्थ्य के मानकों को उठाकर देख लीजिए। हालांकि, जनता को नियंत्रित करने की सरकार की क्षमता लगातार बढ़ी है। मानसिक नियंत्रण मीडिया व वाट्सएप के जरिये और शारीरिक नियंत्रण आधार कार्ड से लेकर भांति-भांति की सुरक्षा एजेंसियों के जरिये। अगर आप इन दोनों तथ्यों को ध्यान में रखेंगे, तो मजबूत सरकार, मजबूत नेता की जो धारणा बन रही, उसे समझने में मदद मिलेगी। मजबूत नेता अपने समर्थकों को नौकरी आदि नहीं दे सकता; हां कुछ बड़बोलेपन की, गाली-गलौज करने की, उत्पात मचाने और दंगे आदि करने की छूट दे सकता है। कुछ कमीशन आदि कमाने की भी छूट दे सकता है। जो नेता अपने समर्थकों को जितना ज्यादा छुट्टा छोड़ेगा, वह उतना ही मजबूत माना जाएगा। पार्टियों के लिए सरकारी टैक्स से इतर बड़े उद्योगपतियों से धन जमा करने की क्षमता बहुत बढ़ गई है, क्योंकि प्राकृतिक संसाधनों का आवंटन अब भी राज्य के हाथ में है, इसलिए राज्य के पास भले टैक्स कम हो, सत्ताधारी दलों के पास पैसा बहुत है। इसके बाद भी आप किसी विकास (मानव विकास) जैसे चमत्कार की उम्मीद कर रहे हैं, तो आपकी मरजी।

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  • Web Title:strong leaders counts