class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

खोदा पहाड़, निकली चुहिया

अम्मा एक कहावत कहती हैं- ‘डाढ़े कटहल होठे तेल।’ कटहल खाने वाले समझ सकते हैं। कटहल अभी डाल पर आया नहीं कि खाने वाले होठों पर तेल लगाकर बैठ गए। वही हाल इनका है। ये प्रधानमंत्री बनने के ख्वाब भी देखने लगे। कांग्रेसी इन्हें दिखा भी रहे हैं। मेरी राय इस आदमी के बारे में खराब ही हुई है। 

विमुद्रीकरण और इसके क्रियान्वयन के मामले में विपक्ष ने निकृष्ट किरदार निभाया है। सरकार द्वारा रचे गए और खाए-अघाए वर्ग द्वारा फैलाए गए इस नैतिक पाखंड के जाल से कितने लोग परेशान हुए, अब भी परेशानियों का सिलसिला थमा नहीं है, 80 मौतों का तो जिक्र भी गैर-मुनासिब है। ये विपक्षी दल इतना भी नहीं कर पाए कि लोगों के बीच जाएं और साफगोई से बताएं कि इस विमुद्रीकरण के तरीकों का विरोध नैतिक या अनैतिक के खांचे में नहीं आता। 

मध्यवर्ग का जो ‘बुलीइंग एटीट्यूड’ है, उससे भी विपक्ष डर रहा था। राहुल गांधी ने दो बार एटीएम जाकर फोटो जरूर खिंचवाया। मैं बस यही सोचता रहा कि भीड़ वाली मानसिकता का शिकार पूरा देश हो गया है। मानो अफीम चटा दिया गया है और लोग सही-गलत का भेद भूल गए हैं। अंतत: हुआ तो यही न कि काला धन वाले 50 प्रतिशत पर सफेद हो गए और जनता लाइन में लगी  ही रह गई। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:dug mountain out mice
From around the web