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मां तुझे सलाम : मलाल नहीं, नाज है अपने लाल पर

मां तुझे सलाम : मलाल नहीं, नाज है अपने लाल पर

देवघर जिले का सारठ अंचल के बाभनगामा गांव निवासी शहीद गणेश पांडेय की 70 वर्षीय माता मणिमाला देवी को इस बात का जरा भी मलाल नहीं है कि उनका बेटा आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में 13 साल पूर्व को शहीद हो गया। उन्हें अपने शहीद बेटे की शहादत पर नाज है। वह कहती हैं कि देश के मान, सम्मान, स्वाभिमान की रक्षा के लिए देश की हर माता को एक बेटा जरूर राष्ट्र के नाम अर्पित कर देना चाहिए। हमारा देश आज ऐसे बेटों के अदम्य साहस के कारण ही सुरक्षित है।

सेना में भर्ती होने पर गणेश पांडेय बहुत खुश था। उसके बोल आज भी मणिमाला के कानों में गूंजते हैं। उसने कहा था कि मां जब बचपन में मैं सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा करने और दुश्मनों के दांत खट्टे करने की बात कहता था, तब तुम्हें मेरी बात पर हंसी आती थी। आज में अपने सपनों को हकीकत में बदल रहा हूं। मुझे यकीन है मां तुमको मेरा काम बहुत पसंद आएगा। शहीद की मां कहती हैं कि जिस दिन सेना की नौकरी के लिए बेटे को घर से विदा कर रही थीं तो एक पल जरूर लगा था कि सेना की नौकरी है मना कर दूं। काफी मेहनत व गरीबी में पढ़ाया-लिखाया था। लगा दिन-रात कलेजे के टुकड़े को खतरे से जूझना पड़ेगा, एक ही सहारा है घर-परिवार का। वहीं अंतरात्मा की आवाज थी कि बेटा को देश की सेवा के लिए भेज रही हो मत रोको। तुम्हारे जैसी लाखों मां के बेटे उस खतरे से खेल देश की रक्षा कर रहे हैं तो उनका बेटा क्यों नहीं। हिम्मत बांधकर भीगी आंखों से आशीर्वाद देकर माथे पर तिलक लगाया और शान से गणेश को घर से विदा किया। मां कहती हैं कि बेटा गणेश जब छुट्टी में घर आता तो अपने दोस्तों और भाइयों से कहता था पढ़ो-लिखो। देश की सच्ची सेवा करनी है तो सेना में भर्ती होना। देश के दुश्मनों को ढेर करने में जो मजा है, वह किसी दूसरे काम में कहां।शहीद की मां मणिमाला देवी बोलीं कि बेटे की शहादत के बाद सरकार ने क्या सहायता की, उस पर सोचने के बजाय उन्हें फख्र इस बात का है कि सारा जमाना उनके बेटे को याद करता है। जब-जब देश के लिए बलिदान की बात होगी, तब-तब उनके बेटे का नाम गूंजेगा।

...तो सवा अरब भारतीय तो चैन की नींद सोएंगे : शहीद गणेश कहता था कि सरहद पर हमारी नींद भले ही खराब हो, लेकिन सवा अरब भारतीयों तो चैन की नींद सोएंगे। मां होने के नाते उसकी बातें सुनकर गर्व महसूस होता था। ऐसी बात सुनकर उसके माथे पर हाथ रखकर हिम्मत देती थीं। जब वह ड्यूटी के लिए रवाना होता था तो आंसुओं को मुश्किल से रोक मुस्कुराते चेहरे से विदा करती थीं।

अपनी मां और भारत मां का भक्त था गणेश : मणिमाला देवी पुराने दिनों की याद ताजा करते हुए बताती हैं कि गणेश पांडेय की शहादत के ठीक पहले जब टेलीफोन पर बात हुई थी, तब कहा थी कि एक तू मेरी मां है और दूसरी भारत मां है। दोनों के मान, सम्मान, स्वाभिमान की रक्षा करना और दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देना जरूरी है मां। दुश्मनों को शांत कर मैं जल्द घर लौटूंगा मां। पोता, पोती, बहू, पिता, भाइयों का ख्याल रखना। मुझपर हमेशा अपना आशीर्वाद बनाए रखना। तुम्हारा आशीर्वाद ही मेरे लिए सब कुछ है। इतना कहते-कहते मणिमाला फफक पड़ती हैं और कहती हैं कि शहादत के बाद भी अकेले में अपने लाल के आने-जाने, हंसने-बोलने समेत हर दिन की बातें अब भी याद आती हैं। वो हमेशा मेरे दिल में अमर रहेगा। वो पूरे देश के लिए अमर है। भारत माता के लिए उसका बलिदान हमेशा याद रहेगा।

तीन आतंकियोंे को मार गिरा कर हुआ था शहीद : देवघर जिले के सारठ अंचल के बाभनगामा गांव का सैनिक गणेश पांडेय 27 अक्टूबर 2004 को शहीद हुआ था। श्रीनगर के बडगाम में आतंकवादियों के साथ सेना की मुठभेड़ में हो गई थी। मुठभेड़ के दौरान उनके साथ पांच अन्य सिपाही भी थे, मगर शहादत सिर्फ गणेश पांडेय के नसीब में थी। इससे पहले गणेश पांडेय ने तीन आतंकवादियों को मार गिराया था।

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  • Web Title:Maa tujhe salam dhanbad, Mother is proud of the martyr son