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जामताड़ा : हर मां को नहीं मिलता ये खास दर्जा

जामताड़ा : हर मां को नहीं मिलता ये खास दर्जा

शहीद सीआरपीएफ जवान परशुराम यादव की मां चंद्रावती देवी को अपने बड़े बेटे पर फख्र है। 16 साल पहले असम के ग्वालपाड़ा में आईईडी विस्फोट में परशुराम शहीद हो गया था। उत्तरप्रदेश के गोरखपुर के रानीपुर गांव से फोन पर उन्होंने कहा कि देश के लिए कभी-कभी ही जान न्योछावर करने का सौभाग्य मिलता है। मेरा बेटा उन्हीं शहीदों में से एक है। वो कहती हैं कि हर मां को ये खास दर्जा नहीं मिलता। बहुत कम मां होती हैं, जो शहीद की मां कहलाती हैं।

चंद्रावती को अपने बेटे पर गर्व है तो दूसरी ओर खोने का गम भी है। चंद्रावती ने बताया कि कई बार सीआरपीएफ बहाली में नाकाम रहने के बाद भी हार नहीं मानी। अंतत: कामयाब हुआ।

दूसरे बेटे को भी सेना में भेजना चाहती थीं : बड़े बेटे को खोने के बाद भी चंद्रावती देवी के दिल में देश के लिए जज्बा कम नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि एक बेटे के शहीद होने के बाद भी मैं चाहती थी कि दूसरा बेटा परमानंद यादव देश की सीमा की रक्षा करे, परंतु घर के हालात को देखते हुए ऐसा नहीं कर पाई। इसका दुख है।

शर्मीला होने के साथ साहसी था परशुराम यादव : परशुराम स्वभाव से ही बहुत शर्मीला था। साथ में बहादुर भी था। वह हमेशा अपने दोस्तों की हौसला आफजाई करता था। अफसोस है कि देश के लिए शहीद होने वाली माताओं को इंसाफ नहीं मिला। आज भी रोजाना सीमा पर कितने जवान शहीद हो रहे हैं। सरकार को चाहिए कि इसपर कठोर कार्रवाई कर आतंकवादियों को सबक सिखाए।

मेरे लिए गर्व की बात : बहुत कम मांओं को शहीद की माता का दर्जा मिलता है। मेरे लिए यह सौभाग्य की बात है। अपने बेटे की कुर्बानी पर मैं मौत तक गर्व करती रहूंगी। - चंद्रावती देवी, शहीद परशुराम की मां

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  • Web Title:Jamtara: Not every mother gets this special status