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दूसरों के लिए मिसाल कायम कर गया जीने का जज्बा
नई दिल्ली, विवेक पांडेय
First Published:29-12-12 11:37 PM
दिल्ली में चलती बस में गैंगरेप का शिकार हुई युवती जिंदगी की जंग भले ही हार गई, लेकिन मौत से लड़ने का उसका जज्बा औरों के लिए मिसाल बन गया। सफदरजंग अस्पताल में युवती का इलाज करने वाले डॉक्टर राजकुमार बताते हैं, 16 दिसंबर की रात जब छह दरिंदों की हवस का शिकार बनी युवती को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया, तब उसकी हालत देख सजर्री में माहिर उनके हाथ कांप उठे। युवती के शरीर से काफी खून बह रहा था और वह दर्द से कराह रही थी। लेकिन उसमें जीने की अद्भुत चाह थी, जिसने उन्हें सर्जरी करने की हिम्मत दी।
राजकुमार के मुताबिक इलाज के दौरान युवती जब भी होश में आती, चिट्ठी लिखकर जीने की इच्छा जताती। यह पूछती कि उसके गुनाहगार सलाखों के पीछे गए कि नहीं। राजकुमार ने बताया कि युवती खुद को एक कामयाब डॉक्टर के रूप में स्थापित करना चाहती थी। वह अपने गांव के लोगों की सेवा करना चाहती थी। आगे चलकर कुछ कर दिखाने की उसकी इसी चाह ने उसकी सांसें बनाए रखी और वह 13 दिन तक जिंदगी से जद्दोजहद करती रही।
उन्होंने कहा कि युवती आज भले ही हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी हिम्मत और हौसला आने वाली हर पीढ़ी के लिए मिसाल बनेगा। बलिया में रहने वाली युवती के रिश्ते की बहन भी बताती है कि युवती बचपन से ही काफी मजबूत दिल की थी। वह झूठ और बुराई से सख्त नफरत करती थी।
घर में जब भी कोई गलत बात होती, वह सबसे पहले आवाज उठाती। युवती के चाचा ने कहा, ‘मेरी भतीजी बहुत बहादुर थी। वह बचपन से ही डॉक्टर बनने के सपने देखती थी। उसकी यही ख्वाहिश थी कि गांव को एक अच्छा डॉक्टर मिले।’ गैंगरेप वाले दिन पीसीआर को युवती की सूचना देने वाले पेट्रोलिंग ऑफिसर जीत सिंह कहते हैं, ‘मैं अपने करियर में कई दर्दनाक हादसों का गवाह बन चुका हूं, लेकिन युवती के साथ हुई दरिंदगी को देखकर मेरी रूह कांप उठी। उसका दर्द मैं अंदर तक महसूस कर सकता था।’
सिंह के मुताबिक जब उन्होंने अखबारों और टीवी पर युवती के हिम्मत व हौसले की कहानी पढ़ी-देखी तो उनकी आंखें नम हो गईं। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि इतनी बुरी हालत में भी मौत को मात देने का ऐसा जज्बा किसी में हो सकता है।
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