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पोस्टमार्टम रिपोर्ट से फंसा पेच
नई दिल्ली हिन्दुस्तान टीम First Published:27-12-2012 12:00:56 AMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल की मौत की गुत्थी और उलझ गई है। बुधवार को उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई, जिसमें छाती व गर्दन पर गंभीर चोट लगने व इसके चलते हार्टअटैक आने को मौत का कारण बताया गया। हालांकि रिपोर्ट की प्रासंगिकता सवालों के घेरे में आ गई है। क्योंकि सुबह के समय आरएमएल अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी ने अपनी रिपोर्ट में कांस्टेबल के शरीर पर किसी प्रकार की चोट न होने का उल्लेख किया था।


चलती बस में गैंगरेप की घटना से शर्मसार हुई दिल्ली पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। बुधवार को दोपहर बाद दिल्ली पुलिस ने कांस्टेबल सुभाष तोमर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी मीडिया को दी गई। बताया गया कि रिपोर्ट में मौत का कारण शरीर पर गंभीर चोट व इसके चलते हार्टअटैक आना है।
 दिल्ली पुलिस द्वारा रिपोर्ट जारी करने के बाद कांस्टेबल की मौत को लेकर उठ रहे सवाल और उलझ गए। मंगलवार को घटना के एक प्रत्यक्षदर्शी ने अपने बयान में कहा था कि तोमर दौड़ते हुए अचानक से गिर गए थे। उन पर किसी ने हमला नहीं किया था।
 इसके बाद आरएमएल अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ टीएस सिद्धू ने भी अपनी रिपोर्ट में प्रत्यक्षदर्शी की बातों को बल दिया। बुधवार सुबह उन्होंने खुलासा किया कि उनकी जांच रिपोर्टो में कांस्टेबल के शरीर पर किसी प्रकार की कोई गंभीर आंतरिक व बाहरी चोट नहीं पाई गई थी। हालांकि दिल्ली पुलिस आयुक्त नीरज कुमार ने अपने बयान में तोमर की गर्दन, सीने और पेट में अंतरिक चोटें आने का दावा किया था। इस बीच कांस्टेबल के परिजनों ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयान को निराधार बताया।
बहरहाल, बयानबाजी के दौर के बीच हत्या की गुत्थी में कई पेच आ गए हैं। ऐसे हालातों में दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच अपराध शाखा को सौंप दी है।
’ चौथे आरोपी को भी पहचाना: पेज-3
’ कष्ट में बीते 24 घंटे: पेज-3
’ आतंकी खतरा बताया था: पेज-5
’ सहयोगियों ने सुनाई खरी-खोटी: पेज-8


लगे गंभीर आरोप
’ सीने व गर्दन पर गंभीर चोटें
’ पसलियां टूटी हुई थीं
’ शरीर में आंतरिक ब्लीडिंग
’ पैरों में चोट लगी हुई थी
’ चोट के चलते बाद में आया हार्टअटैक भी मौत का कारण
केस होगा कमजोर
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद एक बात तो साफ हो गई है कि आठों आरोपियों पर हत्या का मामला तो नहीं बनता। इस रिपोर्ट का आरोपियों को अदालत में लाभ मिलेगा। अगर इसमें मामला बना भी तो गैरइरादतन हत्या का होगा।
—जयदीप मलिक, वरिष्ठ अधिवक्ता

गंभीर चोट का कोई रिकॉर्ड नहीं

तोमर को जब मरणासन्न हालत में भर्ती कराया गया, तो उनके शरीर पर कुछ खरोंचों के अलावा किसी बाहरी चोट का कोई बड़ा निशान नहीं था। उनका पूरा इलाज इसी अस्पताल में हुआ। हमारी सभी रिपोर्ट में भी किसी गंभीर आंतरिक चोट होने का कोई रिकॉर्ड नहीं है। -डॉ. टीएस सिद्धू, आरएमएल अस्पताल

 
 
 
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