शनिवार, 25 अक्टूबर, 2014 | 23:43 | IST
  RSS |    Site Image Loading Image Loading
Image Loading    राजनाथ सोमवार को मुंबई में कर सकते हैं शिवसेना से वार्ता नरेंद्र मोदी ने सफाई और स्वच्छता पर दिया जोर मुंबई में मोदी से उद्धव के मिलने का कार्यक्रम नहीं था: शिवसेना  कांग्रेस ने विवादित लेख पर भाजपा की आलोचना की केन्द्र ने 80 हजार करोड़ की रक्षा परियोजनाओं को दी मंजूरी  कांग्रेस नेता शशि थरूर शामिल हुए स्वच्छता अभियान में हेलमेट के बगैर स्कूटर चला कर विवाद में आए गडकरी  नस्ली घटनाओं पर राज्यों को सलाह देगा गृह मंत्रालय: रिजिजू अश्विका कपूर को फिल्मों के लिए ग्रीन ऑस्कर अवार्ड जम्मू-कश्मीर और झारखंड में पांच चरणों में मतदान की घोषणा
ढाई दशक की चमकदार यात्रा का इतना खामोश अंत?
देहरादून, संजीव कंडवाल First Published:23-12-12 11:52 PM

शायद ही किसी ने सचिन तेंदुलकर के एकदिवसीय कॅरियर के इस अंत की कल्पना की होगी। एक न एक दिन तो उन्हें जाना ही था। लेकिन इसके लिए उन्होंने जो वक्त चुना वह सभी को हैरान कर रहा है। पाकिस्तान की टीम वन-डे सीरीज खेलने भारतीय सरजमीं पर आ चुकी है। रविवार को भरतीय टीम की घोषणा होनी थी। तभी अचानक खबर आई कि क्रिकेट के भगवान ने एकदिवसीय क्रिकेट को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है।

पिछले 23 वर्षों से वह हमारी जिंदगी का अटूट हिस्सा बन चुके थे। इस फैसले से उनके प्रशंसक सदमे में हैं तो मास्टर ब्लास्टर के साथ मिलकर भारतीय क्रिकेट को बुलंदियों पर पहुंचाने वाले पुराने साथी हैरान। कोई समझ नहीं पा रहा कि अचानक यह फैसला क्यों? वह भी मैदान से बाहर।

अभी दो दिन पहले ही मीडिया में खबरें आई थीं कि वह पाक के खिलाफ सीरीज खेलने को तैयार हैं। फिर नागपुर टेस्ट के बाद टीम के चयन में एक हफ्ता था। यदि सचिन ने खुद फैसला लिया है तो यही वक्त क्यों चुना? मैदान से बाहर रहकर? अपने पचासवें वनडे शतक से एक कदम पहले? सचिन के करीबियों की माने तो इसका कारण टीम प्रबंधन का रवैया है। तभी तो मुंबई में टीम की घोषणा होते ही वह मसूरी चल देते हैं। और एक कमरे में खुद को समेटे रखते हैं। तन्हा और खामोश।

 
 
 
|
 
 
टिप्पणियाँ