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शीना बोरा के इस्तीफे पर फर्जी साइनः राकेश मारिया।
सपा-बसपा फिर संकटमोचक
नई दिल्ली, विशेष संवाददाता First Published:05-12-2012 11:29:53 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

सपा और बसपा के परोक्ष समर्थन से खुदरा क्षेत्र में 51 फीसदी एफडीआई मसले पर सरकार अपनी नाक बचाने में कामयाब रही। यदि दोनों दल सदन से वॉकआउट नहीं करते तो तस्वीर बदल सकती थी। विपक्ष के प्रस्ताव के समर्थन में 218, जबकि विपक्ष में 253 वोट पड़े। यदि सपा-बसपा विपक्ष का समर्थन कर देती तो सरकार आठ मतों से हार सकती थी।

सरकार शुरू से ही सपा और बसपा से समर्थन में वोट चाहती थी, क्योंकि राज्यसभा में उसकी स्थिति मजबूत हो जाती। बुधवार को मतदान से गैरहाजिर रहकर दोनों दलों ने सरकार का काम आसान कर दिया।

लोकसभा में वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा एफडीआई पर जब बहस का जवाब दे रहे थे, तब बीच में ही बसपा नेता दारा सिंह चौहान ने वॉकआउट की घोषणा की। बसपा की दलील थी कि वह मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं है। कुछ देर बाद शर्मा ने जैसे ही भाषण खत्म किया, सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव भी पार्टी सांसदों के साथ बर्हिगमन कर गए। विपक्ष को इसका अंदेशा पहले से था। इसलिए प्रस्ताव लाने वाली सुषमा ने साफ कर दिया था कि सपा-बसपा के वॉकआउट के बाद सरकार को कोई मुश्किल नहीं होगी। सुषमा ने कहा कि बहस में 18 दलों ने अपना पक्ष रखा। इनमें 14 ने विरोध, जबकि चार ने समर्थन किया है। विरोधी दलों के सांसदों की संख्या जोड़ें तो 282 है, जबकि समर्थन करने वाली कांग्रेस, एनसीपी, रालोद और राजद के सदस्यों की संख्या 224 है।

 
 
 
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