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गांव देखा तक नहीं, पर गरीबों के लिए बना रहे योजना
नई दिल्ली, हरिकिशन शर्मा First Published:02-12-12 11:24 PM

महात्मा गांधी ने कहा था कि असली भारत गांव में बसता है, लेकिन लगता है कि गांधी दर्शन में शायद योजना आयोग का भरोसा नहीं है। आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया व उनके साथी सदस्यों को गांव की यात्राओं से किस कदर परहेज है इसका खुलासा आरटीआई के एक जवाब में हुआ है।

आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक आयोग को नहीं पता कि अहलूवालिया तथा कई सदस्यों ने बीते तीन साल में कब और किस गांव का दौरा किया और उनके इस दौरे का क्या मकसद था। हिन्दुस्तान ने ‘सूचना का अधिकार’ कानून के तहत आयोग उपाध्यक्ष व सदस्यों द्वारा मई 2009 से अक्तूबर 2012 के  बीच गांवों के दौरे की जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में अहलूवालिया के कार्यालय ने कहा कि उनके पास इसका ब्योरा नहीं है कि अहलूवालिया ने कब-किस गांव का दौरा किया है।

इसी तरह का जवाब सदस्य सौमित्र चौधरी के कार्यालय ने दिया है। एक अन्य सदस्य अरुण मैरा के कार्यालय ने तो स्पष्ट कह दिया कि मैरा शहरी और उद्योग मामलों संबंधी कामकाज देखते हैं, इसलिए गांवों की यात्रा की आधिकारिक यात्रा का प्रश्न नहीं उठता।

दलित तथा सामाजिक मामले देखने वाले सदस्य नरेंद्र जाधव के कार्यालय ने 18 घरेलू दौरों का जिक्र किया है, लेकिन इसमें यह स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने किस गांव का दौरा किया। जब इस बारे में उनकी प्रतिक्रिया मांगी तो वह भड़क गए। आयोग के अन्य सदस्यों, बीके चतुर्वेदी, मिहिर शाह और के. कस्तूरीरंगन के कार्यालय से इस संबंध में कोई जवाब नहीं मिला है। खास बात यह है कि शाह ही आयोग में ग्रामीण विकास संबंधी नीतियां बनाते हैं।

आयोग में महिला सदस्य सैदा हमीद ने मई 2009 से अब तक 92 यात्राओं का ब्योरा दिया है। हालांकि, यहां भी स्पष्ट नहीं है कि उन्होंने किस गांव का दौरा किस मकसद से किया है।

 

 
 
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