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छेड़खानी पर सख्त सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली विशेष संवाददाता
First Published:01-12-12 01:55 AM
सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं से छे़डछाड़ को एक बड़े अपराध बताते हुए सरकार से इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कानून बनाने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने के लिए संसद एक विधेयक पर विचार कर रही रही है, लेकिन यह छेड़छाड़ रोकने में सक्षम नहीं है। इसलिए, जब तक इस संबंध में कानून नहीं बनता, तब तक सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें कुछ दिशानिर्देशों का पालन करेंगी।
शुक्रवार को यह फैसला देते हुए जस्टिस के.एस. राधाकृष्णन की पीठ ने कहा कि काम और पढमई के सिलसिले में ज्यादा से ज्यादा छात्राएं और महिलाएं बाहर निकल रही हैं। उन्हें सुरक्षा देना सभ्य और सुसंस्कृत समाज के लिए जरूरी है। बसों, मॉल और ट्रेनों में उनका अनुभव बडम दर्दनाक व भयावह होता है।
कोर्ट ने कहा कि देश में हर नागरिक को अनुच्छेद 21 (व्यक्तिगत आजादी और जीवन) के तहत सम्मान और गरिमा के साथ जीने का मौलिक अधिकार है। यौन प्रताड़ना, जैसे-छेड़छाड़ अनुच्छेद 14 और 15 के तहत दी गई गारंटियों का भी उल्लंघन है।
वर्तमान में छेड़छाड़ की शिकायतें आईपीसी की धारा-354 और 509 के तहत दर्ज की जाती हैं। ज्यादातर महिलाएं डर के कारण चुप्पी साध लेती हैं। ऐसे मामलों में तीन माह से लेकर एक साल की साधारण सजा का प्रावधन है।
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