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निवेशक मानें, हम कर रहे हैं काम
First Published:06-07-12 12:06 AM
आगामी वर्ष में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की नजरें उनकी पांच प्रमुख चुनौतियों पर हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था में सुधार के रचनाकार रहे प्रधानमंत्री का सारा जोर भारतीयों के लिए समावेशी विकास और विदेशी निवेशकों के लिए एक स्वच्छ बाजार उपलब्ध कराना है।
‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ को ई-मेल पर दिए इंटरव्यू में सिंह ने जिन पांच प्रमुख क्षेत्रों को अपने निकट भविष्य के एजेंडे में रखा है, उनमें वित्तीय घाटे पर नियंत्रण, कर प्रणाली में स्पष्टता, म्यूचुअल फंड और बीमा उद्योग का पुनरुद्धार, विदेशी निवेश के लंबित प्रस्तावों को हरी झंडी और इंफ्रास्ट्रक्चर में तेज सुधार शामिल हैं।
उन्होंने कहा, ‘भारत के विकास की कहानी अबाध है। इसे आगे बनाए रखने के लिए हम पिछले आठ वर्षो से निरंतर काम कर रहे हैं।’ ठिठक रहे विदेशी निवेश को एक तरह से आश्वस्त करते हुए सिंह ने कहा कि वह दिखाना चाहते हैं कि उनकी सरकार स्वच्छ रहेगी और इसके लिए वह लालफीताशाही के बंधनों को ढीला कर रहे हैं।
उन्होंने साफ किया, ‘बिजनेस प्रस्तावों पर सरकारी कार्यवाही तुरंत सुनिश्चित कराने, उबाऊ प्रक्रियाओं को खत्म करने और भारत को व्यवसाय के अनुकूल देश बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हम दुनिया को यह बताना चाहते हैं कि भारत हरेक के साथ स्वच्छ और समुचित व्यवहार करता है और यहां कर मामले में किसी तरह की मनमानी नहीं चलाई जाती है।’
उन्होंने कहा, ‘निवेश के रास्ते बाधित होने के कारण भारतीय निवेश की प्रवृत्ति सोने की ओर उन्मुख हुई है। हमें नए रास्ते तलाशने होंगे ताकि निवेश उत्पादक क्षेत्रों की ओर जाए, जिससे रोजगार और विकास के अवसर पैदा होते हैं, न कि सोने में निवेश होता है।’ इन दिनों वित्त मंत्रलय भी संभाल रहे पीएम ने कहा कि उनके अधिकारी वित्तीय घाटा को कम करने के लिए कई मोर्चो पर काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भविष्य के आर्थिक विकास के मुख्य आधार देश में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी सरकार ने निवेशकों को आमंत्रित किया है। ‘रेलवे, सड़क, पोर्ट और नागरिक उड्डयन क्षेत्र की बढ़ोतरी में बड़ी संख्या में निवेश के रास्ते खुल रहे हैं। दुनिया के दरवाजे खुले हुए हैं कि वे हमारे हाथ को मजबूत करें और इन महत्वपूर्ण सेक्टरों में योगदान करें जिससे कि अर्थव्यवस्था की गाड़ी को आगे बढ़ाई जा सके।’
सिंह ने कहा कि अब लोगों को इस बारे में बहस करनी चाहिए कि सर्वजन हिताय और मुक्त अर्थव्यवस्था को कैसे साकार किया जाए। उन्होंने कहा कि अब इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि बेहतर काम करनेवाली मुक्त अर्थव्यवस्था का निर्माण कैसे हो।
सिंह ने सुधार की दिशा में प्रगति के साक्ष्य के तौर पर कोका-कोला और फर्नीचर समूह आईकेईए की निवेश योजनाओं को पेश किया। उन्होंने जीई के अध्यक्ष की इस टिप्पणी से सहमति जताई कि जमीनी हालात उतने खराब नहीं हैं जितनी कि बाजार में चर्चा हो रही है।
पेंशन, बीमा और बैंकिंग जैसे क्षेत्रों में लंबित सुधारों पर रोडमैप के बारे में पूछने पर सिंह ने कहा कि कानून कहीं बाधक नहीं है। सबसे अहम राजनीतिक सहमति बनाना होता है, जहां मतों में भिन्नता होती है। उन्होंने अपनी आगामी पाकिस्तान यात्रा से सकारात्मक उम्मीदें जताईं।
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