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खून का मिलान हुए बिना भी बदलवा सकेंगे किडनी
नई दिल्ली, निशि भाट
First Published:17-06-12 11:24 PM
किडनी प्रत्यारोपण के लिए एक ही ग्रुप के खून का होना अनिवार्य नहीं रहा। सर गंगाराम अस्पताल में इस तरह का एक सफल ऑपरेशन हुआ है।
अब तक परिवार का कोई सदस्य चाहकर भी उस समय किडनी दान नहीं कर सकता था जब तक उसका खून मरीज के खून से मेल न खाता हो। लेकिन, 13 जून को सर गंगाराम अस्पताल में हुए ऑपरेशन में अलीगढ़ निवासी करन सिंह ने अपनी 39 वर्षीय भाभी राधा को किडनी देकर उनकी जान बचाई।
राधा के पति पहले से डायबिटीज के मरीज हैं। इसलिए निगेटिव खून होने के बावजूद देवर की किडनी को राधा के पॉजिटिव खून के अनुसार बनाया गया। अस्पताल के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. ए.के. भल्ला ने बताया कि फिल्टर मशीन से पहले करन के खून के एंटीजन को राधा के खून के एंटीजन के अनुसार बनाया गया। इसके बाद लेबोरेटरी में टेबल सर्जरी की गई। फिर राधा के शरीर में करन की किडनी को प्रत्यारोपित कर दिया गया।
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