मनमोहन ने उत्तराखंड को 1000 करोड़ देने का किया ऐलान बिग बॉस: सिख भावनाओं के अपमान मामले में फैसला नहीं मोदी तानाशाह हैं और राजनाथ चालाक: सुधीन्द्र कुलकर्णी ममता ने माकपा पर हत्या की साजिश का आरोप लगाया दिल्ली सरकार को अफजल की फांसी की सूचना थी: केंद्र गंगा को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किये जाने की मांग उठी नीतीश ने हासिल किया विश्वास मत, कांग्रेस ने दिया साथ
नीतीश ने हासिल किया विश्वास मत, कांग्रेस ने दिया साथ
राजा भैया का होगा पॉलीग्राफ परीक्षण, अदालत की इजाजत राजा भैया का होगा पॉलीग्राफ परीक्षण, अदालत की इजाजत
विदेशी निवेशकों ने देश से निकाले 1,000 अरब
नई दिल्ली, एजेंसियां
First Published:10-06-12 11:22 PM
धनी विदेशी इकाइयों ने तीन माह में ही भारतीय बाजार से करीब एक लाख करोड़ रुपये से अधिक (करीब 20 अरब डॉलर) निकाल लिए हैं। ये इकाइयां भारत में पी-नोट्स (पार्टिसिपेटरी नोट्स) के जरिए निवेश करती हैं। सरकार के कराधान दायरे और काले धन जाल में फंसने की आशंका से ये कंपनियां अपना पैसा निकाल रही हैं।
विदेशी इकाइयों के इस कदम से कुल विदेशी संस्थागत निवेश (एफआईआई) में पी-नोट्स के जरिए किए गए निवेश की राशि का हिस्सा घटकर 10 फीसदी रह गया है। कुछ साल पहले यह 50 फीसदी से अधिक था। पी-नोट्स के जरिए अधिक आय वाले विदेशी तथा अन्य धनी निवेश भारत में निवेश कर सकते हैं। यह निवेश एफआईआई के माध्यम से किया जाता है।
सूत्रों का कहना है कि मार्च में जीएएआर की नई कराधान प्रणाली और कर कानूनों में पूर्व की तारीख से बदलाव के प्रस्ताव के बाद पी-नोट्स के जरिए निवेश निकलना शुरू हो गया। पी-नोट्स निवेशकों ने भारतीय इक्विटी और ऋण बाजार से पहले ही एक लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं, जबकि नई कर नीति के प्रस्ताव के बाद हुए 50,000 करोड़ के ताजा निवेश पर भी फैसला हो सकता है। हालांकि जीएएआर को एक साल के लिए स्थगित किया गया है। विदेशी लेन-देन के लिए प्रस्तावित टैक्स एफआईआई पर भी लागू होगा।
10

अन्य खबरें
टिप्पणियाँ
स्थानीय ख़बरें
एन सी आर
पंजाब
उत्तराखंड
उत्तर प्रदेश
बिहार
झारखंड
लाइवहिन्दुस्तान पर अन्य ख़बरें
आज का मौसम राशिफल



ई-मेल
