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मुस्लिम लड़की 15 वर्ष में कर सकती है शादी
नई दिल्ली, प्रभात कुमार
First Published:03-06-12 11:19 PM
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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि 15 वर्ष की मुस्लिम लड़की अपनी मर्जी से शादी कर सकती है और इस शादी को अमान्य नहीं कहा जा सकता। मुस्लिस पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रावधानों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने लगभग 16 साल की उम्र में घर से भागकर प्रेम विवाह करने वाली नगमा (बदला हुआ नाम) को उसके पति के साथ रहने की छूट दे दी है। अदालत ने यह फैसला नगमा की मां ताहरा बेगम की याचिका पर दिया है।

जस्टिस एस. रविंद्र भट्ट व एस.पी. गर्ग की पीठ ने कहा कि किसी मुस्लिम लड़की की कम उम्र में शादी हो जाती है या वह खुद कर लेती तो 18 वर्ष की होने पर शादी बनाए रखने या तोड़ने का फैसला ले सकती है। पीठ ने पूर्व के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी कानून में 18 साल से कम उम्र में प्रेम करने पर प्रतिबंध नहीं है।

कोर्ट ने 15 साल 10 महीने की नगमा को उसके पति के साथ रहने की अनुमति दे दी। हालांकि नगमा की कम उम्र को ध्यान में रखते हुए बाल कल्याण समिति को उसकी निगरानी का निर्देश भी दिया है। 18 साल का होने तक नगमा और उसके पति को हर छह महीने पर समिति के सामने पेश होना होगा। बीते अप्रैल में ताहरा बेगम ने याचिका दायर कर पड़ोसी मेहताब पर अपनी नाबालिग बेटी के अपहरण का आरोप लगाया था। 18 अप्रैल को नगमा ने कोर्ट को बताया कि वह अपनी मर्जी से घर छोड़कर गई थी और अपने प्रेमी से शादी कर चुकी है।

 
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टिप्पणियाँ
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टिप्पणियॉ पढ़े(4)
दिल्ली high court फैसला सही मन जाना chahiye,क्योंकि १५ साल की larki mansik rup se समझदार hoti है और apne bare me achha bura samajh sakti है,और isse hmare samaj में जो larki lekar bhagna rep होना जो दिनों दिन बढती जारही है is कानून se is तरह की घिनौनी घटना में काफी kami aaegi,और ye कानून सभी धर्म के लिए होनी
By munna khan (4th-June-2012 07:01:PM)
मेरा निवेदन है की हिंदुस्तान में जो कानून है वो अंग्रेजो के द्वारा बनाये हुए है चाहे वो हिन्दू बोर्ड हो या मुस्लिम बोर्ड इन कानूनों में संशोधन कर भारतीय कानून बनाया जाये जिसमे कोई हिन्दू कानून और मुस्लिम कानून की आड़ लेकर गलत फायदा न उठाये एक तरफ हम बाल विवाह का विरोध करते हैं हाई कोर्ट के इस फैसले से मुस्लिम समाज में बाल विवाह को बढावा मिलेगा, मै hindustan के ज़रिये से मुस्लिम पेर्सोनेल LAW बोर्ड से कहना चाहूँगा की वो मुस्लिम विवाह कानून में शाशोधन करे
By ash (4th-June-2012 05:47:PM)
यह तो एकदम बढ़िया फैसला है | दिल्ली हाई कोर्ट जिंदाबाद !
By Sukumar (4th-June-2012 04:56:PM)
दिल्ली हाई कोर्ट का ये फैसला किसी भी तरह से सही नहीं एक तरफ हम बाल विवाह का विरोध करते हैं हाई कोर्ट के इस फैसले से मुस्लिम समाज में बाल विवाह को बढावा मिलेगा, मै hindustan के ज़रिये से मुस्लिम पेर्सोनेल LAW बोर्ड से कहना चाहूँगा की वो मुस्लिम विवाह कानून में शाशोधन करे
By faiz begh (4th-June-2012 10:43:AM)
 
 
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