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तीन माह में हो क्षमा याचिका पर फैसला: उज्ज्वल निकम
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:16-12-2012 08:09:59 PMLast Updated:16-12-2012 09:23:45 PM
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संसद हमले के अभियुक्त अफजल गुरू को यथाशीघ्र फांसी पर चढ़ाने की मांग के बीच वर्ष 2008 के मुम्बई हमले के विशेष सरकारी वकील ने कहा है कि किसी भी दया याचिका पर फैसला करने के लिए राष्ट्रपति के पास तीन माह की समय सीमा होनी चाहिए।

उज्ज्वल निकम ने यहां एक सामाजिक कार्यक्रम में कहा कि कानून में यह प्रावधान किया जाना चाहिए कि यदि राष्ट्रपति दया याचिका पर अपना निर्णय नहीं देते हैं तो वह स्वत: ही खारिज हो जाए। उन्होंने कहा कि राजव्यवस्था में खंडित जनादेश आने एवं दिनोंदिन स्थिति उलझननूर्ण बनने से ऐसे मुद्दों पर जल्द निर्णय खींचतान की वजह से संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि आतंकवादी हमलों के स्थानों पर कुशल सुरक्षा अभियान के लिए खबरिया चैनलों को दूर रखा जाए क्योंकि इससे बाधा खड़ी होती है। निकम ने एक सेवानिवृत्त सीबीआई निदेशक की इस शिकायत की भी आलोचना की कि कुछ मुद्दों पर उन पर दबाव डाला गया। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी बात थी तो उन्होंने उसी समय ही क्यों नहीं इस्तीफा दे दिया।

हाल ही में गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा था कि वह संसद के शीतकालीन सत्र के बाद मत्युदंड पाए अफजल गुरू और छह अन्य की क्षमा याचिका संबंधी दस्तावेज देखेंगे। उन्होंने कहा था, केवल अफजल गुरू का दस्तावेज नहीं है। मुझे सात फाइलें देखनी हैं। मैं संसद सत्र के बाद देखूंगा। संसद का शीतकालीन सत्र 20 दिसंबर तक है।

गुरू की क्षमा याचिका को समीक्षा के लिए राष्ट्रपति ने केंद्रीय गृहमंत्रालय के पास भेजा था। उसे वर्ष 2001 के संसद हमले में मौत की सजा सुनाई गई है। इस हमले में नौ लोग मारे गए थे जबकि 16 अन्य घायल हुए थे।

 
 
 
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