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खाप पंचायतों पर अंकुश मामले में आगे बढ़ा सु्प्रीम कोर्ट
एजेंसी, नई दिल्ली First Published:04-01-2013 06:44:59 PMLast Updated:04-01-2013 06:57:13 PM
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उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि अंतरजातीय और गोत्र के भीतर विवाह करने वाले युगल, विशेषकर महिलाओं के मामले में खाप पंचायतों को फरमान जारी करने से रोकने से पहले वह उनका दृष्टिकोण भी जानना चाहता है।

केन्द्र सरकार ने महिलाओं के प्रति खाप पंचायतों के अपराधों पर निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है क्योंकि पुलिस महिलाओं को संरक्षण प्रदान करने में विफल रही है। केन्द्र का कहना था कि इस वजह से महिलाओं को अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में कोई भी आदेश देने से पहले वह खाप पंचायतों का दष्टिकोण भी जानना चाहती है। न्यायालय ने कहा कि खाप पंचायत 14 जनवरी को इस मामले की सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रख सकती हैं।

इस बीच, न्यायालय ने पायलट परियोजना के रूप में हरियाणा के रोहतक और जींद जिलों के साथ ही उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की स्थिति पर गौर करेंगे जहां खाप पंचायतें बहुत सक्रिय हैं। न्यायालय ने इन जिलों के पुलिस अधीक्षकों को तलब किया है।

न्यायालय ने गैर सरकारी संगठन शक्ति वाहिनी से कहा कि खाप के बुजुर्गों को सूचित किया जाये कि वे यहां आकर अपना दृष्टिकोण रखें। इस संगठन और केन्द्र द्वारा समाचार पत्रों में खाप के दष्टिकोण की ओर ध्यान आकर्षित किये जाने पर न्यायाधीशों ने कहा कि इन बयानों के लिये उन्हें जवाबदेह ठहराया जा रहा है, लेकिन हमें उनके दृष्टिकोण की जानकारी नहीं है। वहां कई खाप हो सकती हैं और उनकी राय में भी भिन्नता हो सकती है।

 
 
 
 
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