मंगलवार, 02 सितम्बर, 2014 | 14:49 | IST
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लोकपाल के दायरे में आएं PM और कोर्ट: संतोष हेगड़े
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:28-11-12 11:37 AM
Last Updated:28-11-12 12:14 PM
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उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश और कर्नाटक के पूर्व लोकायुक्त संतोष हेगड़े ने बुधवार को कहा कि प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में लाने में कुछ भी गलत नहीं है, क्योंकि वह भी अन्य लोक सेवकों की तरह हैं।
   
न्यायमूर्ति हेगड़े ने कहा कि लोकपाल के दायरे में प्रधानमंत्री के होने में गलत क्या है क्या प्रधानमंत्री लोक सेवक नहीं हैं क्या अन्य देशों में प्रधानमंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले नहीं होते जापान में हर दूसरे साल एक प्रधानमंत्री पर मुकदमा चलता है। (पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति) निक्सन पर मुकदमा चला। प्रधानमंत्री को लेकर इतनी महान बात क्या है।
    
हेगड़े ने कहा कि पूर्व में भी भारतीय प्रधानमंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं और केवल राष्ट्रपति और राज्यपालों को अभियोजन से छूट प्राप्त है, प्रधानमंत्री को नहीं।
   
उन्होंने कहा कि हमने बोफोर्स और जेएमएम रिश्वतखोरी मामले में दो पूर्व प्रधानमंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप देखे थे। लोकतंत्र में किसी व्यक्ति को महज इसलिए अभियोजन से छूट कैसे दी जा सकती है, क्योंकि वह किसी पद पर हैं संविधान कुछ मामलों में राष्ट्रपति और राज्यपालों को अभियोजन से छूट देता है।

किसी ऐसे व्यक्ति पर यह सिद्धांत लागू नहीं हो सकता जो नियमित आधार पर कार्यकारी आदेश जारी करते हों।

अरविंद केजरीवाल की नवगठित आम आदमी पार्टी के बारे मे यह पूछे जाने कि उससे क्या उम्मीदें हैं, हेगड़े ने इसकी सफलता पर संदेह जताते हुए कहा कि यह आसान काम नहीं है।
   
उन्होंने कहा कि मेरी आशंका सिर्फ यह है कि आज कल के माहौल में राजनीतिक व्यवस्था की इतनी मांगों के कारण कोई राजनीतिक दल कैसे खुद को बरकरार रख पाएगा। कश्मीर से कन्याकुमारी तक से संसद के करीब 546 सदस्यों के निर्वाचन के लिए बड़ी धनराशि चाहिए होती है। यह कोई आसान काम नहीं है ।
   
हेगड़े ने कहा कि सैद्धांतिक तौर पर यह अच्छी चीज है, लेकिन क्या हकीकत में यह सफल हो सकती है। न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को लेकर केजरीवाल के संभावित खुलासों के सवाल पर उन्होंने कहा कि क्या हमने न्यायपालिका में अनियमितताओं के बारे में नहीं सुना उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश थे जिनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हुई थी लेकिन यह पूरी नहीं हुई। एक मुख्य न्यायाधीश जिनके खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू हुई थी। न्यायमूर्ति दिनाकरण, जिन्होंने इस्तीफा दे दिया इसलिए कार्यवाही समाप्त हो गयी।
   
हेगड़े ने कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के सौमित्र सेन थे। उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हुई और बंद हो गई, आगे कहीं नहीं पहुंची। पंजाब उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति निर्मल यादव के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 34 न्यायाधीशों के खिलाफ सीबीआई जांच कर रही है।
   
उन्होंने कहा कि इसलिए वहां भी भ्रष्टाचार है और उनके पास कुछ न्यायाधीशों के खिलाफ कुछ सामग्री जरूर होगी। क्या न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए आत्म़नियमन एक तरीका है, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि हमने इसका प्रयास किया और इसमें सफलता नहीं मिली। हमने इतने सालों तक इसका प्रयास किया। न्यायपालिका के बारे में सभी ने कहा कि हम आत्म़नियमन करेंगे, हम नियंत्रण करेंगे, उच्च अदालतें निचली अदालतों पर नजर रखेंगी। कुछ भी नहीं हुआ।
   
हेगड़े से जब पूछा गया कि क्या वह ऐसा लोकपाल चाहते हैं जिसे न्यायाधीशों के खिलाफ जांच करने और उन पर मुकदमा चलाने का अधिकार हो तो उन्होंने सहमति जताई।
   
उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की जांच कौन करेगा कोई तो होना चाहिए। आप सेवानिवत्त न्यायाधीशों की एक अलग जांच सतर्कता इकाई चाहते हैं तो इसे बनाएं, यह ठीक है लेकिन यह भी जांच के दायरे से बाहर नहीं होनी चाहिए।
   
हेगड़े ने कहा कि जिस न्यायाधीश की जांच हो रही है वह उसी संस्था, अदालत में जा सकते हैं जिसमें वह एक न्यायाधीश हैं और फिर वह जांच पर सवाल उठा सकते हैं।

 
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