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प्रणब मुखर्जी को चुनौती देने वाली संगमा की याचिका खारिज
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:05-12-12 12:26 PM
Last Updated:05-12-12 12:45 PM
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को बहुमत से पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा की वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति पद पर चयन को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी।
मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने दो के मुकाबले तीन से फैसला दिया कि संगमा की याचिका नियमित सुनवाई के योग्य नहीं है। मुख्य न्यायाधीश ने अपनी और न्यायमूर्ति पी सदाशिवम और एस एस निझ्झर की ओर से फैसला सुनाते हुए कहा, चुनाव याचिका विचारयोग्य नहीं है। यह खारिज की जाती है।
भिन्न मत रखने वाले अन्य दो न्यायाधीशों ने अपना निर्णय अलग से सुनाते हुए राय दी कि यह सुनवाई योग्य है। न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर ने अपनी और न्यायमूर्ति राजन गोगोई की ओर से फैसला सुनाते हुए कहा कि चूंकि यह आरोप लगाया गया था कि मुखर्जी भारतीय सांख्यिकी संस्थान के अध्यक्ष के रूप में लाभ के पद पर थे, इसलिये उनका विचार है कि संगमा द्वारा दायर याचिका सुनवाई योग्य है।
उन्होंने कहा कि वह अगले सप्ताह बतायेंगे कि उनकी राय मुख्य न्यायाधीश सहित बहुमत से अलग क्यों है।
इससे पहले न्यायालय ने मुखर्जी के संक्षिप्त हलफनामे को रिकार्ड में लिया। उन्होंने कहा है कि उनके निर्वाचन को चुनौती देने का आधार स्पष्ट तौर पर गलत है।
संगमा ने दावा किया है कि मुखर्जी जब राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल हुए तो वह आईएसआई, कोलकाता के अध्यक्ष के तौर पर लाभ के पद पर थे। साथ ही वह उस वक्त लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता भी थे।
इससे पहले, अटॉर्नी जनरल ने लाभ के पद के मुद्दे पर संगमा की याचिका का विरोध किया था। वाहनवती ने कहा कि लाभ का पद ऐसा पद है जो निश्चित तौर पर सरकार के तहत होना चाहिए, जिसके पास नियुक्ति और हटाने की शक्ति हो और पद धारण करने के एवज में कुछ वेतन अवश्य मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय सांख्यिकीय संस्थान के अध्यक्ष पद के साथ ऐसा नहीं है। न्यायालय ने कहा कि आईएसआई के अध्यक्ष पद के साथ कोई वित्तीय लाभ नहीं जुड़ा हुआ था। इसके अलावा, पद निश्चित तौर पर इस तरह का होना चाहिए जहां नियुक्ति करने वाले प्राधिकार के जरिए पदाधिकारियों को प्रभावित किया जा सके।
मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने दो के मुकाबले तीन से फैसला दिया कि संगमा की याचिका नियमित सुनवाई के योग्य नहीं है। मुख्य न्यायाधीश ने अपनी और न्यायमूर्ति पी सदाशिवम और एस एस निझ्झर की ओर से फैसला सुनाते हुए कहा, चुनाव याचिका विचारयोग्य नहीं है। यह खारिज की जाती है।
भिन्न मत रखने वाले अन्य दो न्यायाधीशों ने अपना निर्णय अलग से सुनाते हुए राय दी कि यह सुनवाई योग्य है। न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर ने अपनी और न्यायमूर्ति राजन गोगोई की ओर से फैसला सुनाते हुए कहा कि चूंकि यह आरोप लगाया गया था कि मुखर्जी भारतीय सांख्यिकी संस्थान के अध्यक्ष के रूप में लाभ के पद पर थे, इसलिये उनका विचार है कि संगमा द्वारा दायर याचिका सुनवाई योग्य है।
उन्होंने कहा कि वह अगले सप्ताह बतायेंगे कि उनकी राय मुख्य न्यायाधीश सहित बहुमत से अलग क्यों है।
संगमा ने दावा किया है कि मुखर्जी जब राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल हुए तो वह आईएसआई, कोलकाता के अध्यक्ष के तौर पर लाभ के पद पर थे। साथ ही वह उस वक्त लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता भी थे।
इससे पहले, अटॉर्नी जनरल ने लाभ के पद के मुद्दे पर संगमा की याचिका का विरोध किया था। वाहनवती ने कहा कि लाभ का पद ऐसा पद है जो निश्चित तौर पर सरकार के तहत होना चाहिए, जिसके पास नियुक्ति और हटाने की शक्ति हो और पद धारण करने के एवज में कुछ वेतन अवश्य मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय सांख्यिकीय संस्थान के अध्यक्ष पद के साथ ऐसा नहीं है। न्यायालय ने कहा कि आईएसआई के अध्यक्ष पद के साथ कोई वित्तीय लाभ नहीं जुड़ा हुआ था। इसके अलावा, पद निश्चित तौर पर इस तरह का होना चाहिए जहां नियुक्ति करने वाले प्राधिकार के जरिए पदाधिकारियों को प्रभावित किया जा सके।
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