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मुकदमा तेजी से पूरा होना चाहिए: प्रधान न्यायाधीश
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:02-01-13 09:20 PM
Last Updated:02-01-13 11:38 PM
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महिलाओं के खिलाफ यौन अपराध के मामलों से निपटने के लिए बुधवार को यहां एक त्वरित अदालत का उद्घाटन करने के बाद भारत के प्रधान न्यायाधीश अलतमस कबीर ने दिल्ली में 23 वर्षीय छात्रा के साथ गत 16 दिसंबर को चलती बस में सामूहिक बलात्कार की घटना के मामले में तेजी से मुकदमा पूरा किये जाने की वकालत की।

इस जघन्य वारदात के खिलाफ सामने आये जनता के रोष को जायज ठहराते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि अगर वाहनों के शीशों से काली फिल्म हटाने को लेकर उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देशों का पालन किया गया होता तो इस घटना से बचा जा सकता था।

उन्होंने कहा कि यह जानकार अच्छा लगता है कि 16 दिसंबर की जघन्य घटना के बाद लोगों ने महिलाओं के खिलाफ अपराध पर आवाज उठाना शुरू कर दिया है।

प्रधान न्यायाधीश ने उम्मीद जताई कि यहां साकेत जिला अदालत परिसर में त्वरित अदालत में काम बहुत जल्दी शुरू होगा। बहरहाल उन्होंने कहा कि आरोप़ प्रत्यारोप से बचना चाहिए।

न्यायमूर्ति कबीर ने कहा कि आरोप़ प्रत्यारोप से कुछ हासिल नहीं होगा। हमें समस्या की जड़ में जाना है। यह मामला जनता की नजरों में है और इस मामले में जल्दी से जल्दी फैसला आना चाहिए।

प्रधान न्यायाधीश ने लोगों की इस प्रतिक्रिया को खतरनाक कहा कि आरोपियों को जनता के हवाले कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि लोगों की प्रतिक्रिया है कि आरोपियों पर मुकदमा नहीं चलाएं। उन्हें हमें सौप दें, हम उनसे निपटेंगे। उन्हें फांसी पर लटका दो।

न्यायमूर्ति कबीर ने कहा कि खासतौर पर महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों से निपटने के लिए त्वरित अदालत न केवल जरूरत है, बल्कि स्वागत योग्य भी है और सरकार भी इस तरह के मामलों में त्वरित अदालतों की जरूरत को लेकर जागरूक हो गयी है।उन्होंने कहा कि वह प्रशासन के साथ अपने स्तर पर यथासंभव प्रयास करेंगे कि अदालत के समक्ष मामला आने से पहले के उसके हिस्से का जल्दी से जल्दी निपटारा हो।

न्यायमूर्ति कबीर ने कहा कि दिल्ली के अलग अलग भागों में चार अन्य त्वरित अदालतें शुरू होंगी। दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी मुरुगसेन ने कहा कि त्वरित अदालतों के लिए न्यायिक अधिकारियों को चिन्हित कर लिया गया है और यथासंभव मामलों को दिन प्रतिदिन के आधार पर लिया जाएगा।

 
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टिप्पणियाँ
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टिप्पणियॉ पढ़े(2)
jo ye ginona apradh hua hai uske liye hum sub dil se dukhi hai par sarkar ne isme jyada time nahi lagana chahiye
By ravi (3rd-January-2013 10:33:AM)
wah kitna tej hai hamara kanun jo 16 dec ko hua blatkar ke 17 din bad bhi use saja nahi mil pai mar ho ladki mar gai ek request hai use fasi ki saja nahi honi chahiye itni asan mout use nasib nahi honi use asi saja mele jise puri duniya'ki ruh kap jaye as in film ganga jal
By dubey (3rd-January-2013 09:25:AM)
 
 
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