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नए साल पर देश की बेटी को भावभीनी श्रद्धांजलि
नई दिल्ली, लाइव हिन्दुस्तान
First Published:01-01-13 09:26 AM
Last Updated:01-01-13 02:24 PM
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नए साल की शुरुआत गम के साए में हुई है और इसका असर देशभर में देखा गया। तमाम आयोजन रद्द किए गए और सड़कें सुनसान पड़ी रहीं। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और सोनिया गांधी समेत कई नेताओं ने जश्न से किनारा किया। वहीं सेना ने भी देशभर में होने वाले आयोजनों को रद्द कर देश की बहादुर बेटी को श्रद्धांजलि दी है।

देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पटाखे और रोशनी की बजाय लोग मोमबत्ती लौ से साल 2012 के अंधेरे को पाटने की कोशिशें की। काले रविवार को दरिंदगी का शिकार हुई देश की एक बेटी को श्रद्धांजलि देकर लोग नए साल को बेहतर बनाने का संकल्प लेकर जुटे। यहां खामोशी है। और ऐसी ही खामोशी दिल्ली की दूसरी सड़कों पर भी दिखी। जश्न नहीं मगर उम्मीद जरूर है।

कमोबेश यही नजारा ग्लैमर और चकाचौंध की राजधानी मुंबई का भी है। साल 2008 के मुंबई हमले को छोड़ दें तो नए साल का इतना फीका स्वागत शायद ही कभी हुआ हो, अव्वल तो लोग जश्न के लिए जुटे ही नहीं। मगर जो जुटे भी उनकी जुबान पर उस बहादुर बेटी की कुर्बानी के साथ-साथ सुरक्षा की चिंता बनी रही।

नए साल का ये खामोश आगाज महज दिल्ली और मुंबई तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि कोलकाता, हैदराबाद, बैंगलोर और अहमदाबाद जैसे शहरों में भी जश्न पर श्रद्धांजलि भारी पड़ गई।

आम तो आम खास लोगों ने भी नए साल के जश्न से किनारा किया। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने तमाम आयोजन रद्द कर दिए। सोनिया गांधी ने खुद को जश्न से दूर रखा। पंजाब और हरियाणा के कई सरकारी कार्यक्रम रद्द किए गए।

उड़ीसा के मुख्यमंत्री भी जश्न में शामिल नहीं हुए। भारतीय सेना ने भी देशभर के अपने आयोजन रद्द किए। जाहिर है देश गमजदा है। गम महज एक जान के जाने का नहीं है, बल्कि गम इस बात का भी है कि आधुनिकता के रथ पर सवार हम आज भी खुद को बदल पाने में नाकाम हैं।

 
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