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मनमोहन बने 'सिंहम', बोले जो किया वो जरूरी था
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:15-09-12 12:55 PM
Last Updated:15-09-12 02:52 PM
डीजल और एलपीजी के दाम बढ़ाने के बाद से बड़े पैमाने पर विरोध से अविचलित प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को इसे सही दिशा में उठाया गया कदम बताया और उम्मीद जताई कि अर्थव्यवस्था मौजूदा वित्तीय वर्ष के दूसरे पखवाड़े में फिर से उछाल लेगी।
प्रधानमंत्री ने 12वीं पंचवर्षीय योजना के दस्तावेज को मंजूरी के लिये बुलाई गयी योजना आयोग की पूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि डीजल की कीमत में हाल की बढ़ोतरी सही दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। सिंह ने ऊर्जा नीति की व्यापक पुनरीक्षा की जरूरत बताते हुए कहा कि देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिये यह महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा एक कठिन क्षेत्र है जहां नीति की व्यापक पुनरीक्षा की जरूरत है। हमारे पास ऊर्जा की कमी है और आयात पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिये यह महत्वपूर्ण है कि हम घरेलू उत्पादन बढ़ायें और ऊर्जा दक्षता में भी वृद्धि करें।
सरकार ने दो दिन पहले ही डीजल की कीमत में पांच रुपए प्रति लीटर का इजाफा किया है और सब्सिडी वाले रसोई गैस की आपूर्ति प्रति परिवार प्रति वर्ष छह सिलिंडर तक
सीमित कर दी है। इन निर्णयों का जनता और राजनीतिक संगठन विरोध कर रहे हैं। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा ये अल्पकालिक अड़चने हैं, इससे आगे आने वाले समय में हमारी तरक्की की संभावनाओं को लेकर निराशा नहीं उत्पन्न होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी तात्कालिक प्राथमिकता होनी चाहिए कि इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में वृद्धि दर को पुन: गति प्रदान करने के लिए क्या प्रयास किए जा
सकते हैं। इसके बाद हमें योजनावधि के अंत तक वृद्धि दर को करीब नौ फीसदी पर पहुंचाने की कोशिश करनी चाहिए। बारहवीं योजना में 8.2 फीसदी की सालाना औसत वृद्धि दर का अनुमान जाहिर किया गया है जो पूर्वानुमानित नौ फीसद की वृद्धि दर से कम है। अर्थव्यवस्था ने 11वीं योजना में 7.9 फीसदी की वृद्धि दर दर्ज की। प्रधानमंत्री की राय में 11वीं योजना की औसत वृद्धि दर भी अच्छी ही मानी जाएगी क्योंकि इस दौरान दो वैश्विक वित्तीय संकटों से दो चार होना पड़ा, इनमें पहला संकट 2008 में और दूसरा 2011 में उत्पन्न हुआ। सिंह ने कहा कि 2004-05 से 2009-10 के बीच गरीबी इससे पहले के 10 वर्षों की तुलना में दोगुनी गति कम हुई जबकि 11वीं योजनावधि में कषि की वृद्धि दर 3.3 फीसदी रही जो 10वीं योजना में दर्ज 2.4 फीसदी की वृद्धि के मुकाबले बहुत अधिक है। बाहरवीं योजनावधि के दौरान वृद्धि का लक्ष्य नौ फीसदी से घटाकर 8.2 फीसदी करने के संबंध में उन्होंने कहा कि वैश्विक हालात को देखते हुए अनुमान में थोड़ी कमी व्यावहारिक है।
सीमित कर दी है। इन निर्णयों का जनता और राजनीतिक संगठन विरोध कर रहे हैं। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा ये अल्पकालिक अड़चने हैं, इससे आगे आने वाले समय में हमारी तरक्की की संभावनाओं को लेकर निराशा नहीं उत्पन्न होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी तात्कालिक प्राथमिकता होनी चाहिए कि इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में वृद्धि दर को पुन: गति प्रदान करने के लिए क्या प्रयास किए जा
सकते हैं। इसके बाद हमें योजनावधि के अंत तक वृद्धि दर को करीब नौ फीसदी पर पहुंचाने की कोशिश करनी चाहिए। बारहवीं योजना में 8.2 फीसदी की सालाना औसत वृद्धि दर का अनुमान जाहिर किया गया है जो पूर्वानुमानित नौ फीसद की वृद्धि दर से कम है। अर्थव्यवस्था ने 11वीं योजना में 7.9 फीसदी की वृद्धि दर दर्ज की। प्रधानमंत्री की राय में 11वीं योजना की औसत वृद्धि दर भी अच्छी ही मानी जाएगी क्योंकि इस दौरान दो वैश्विक वित्तीय संकटों से दो चार होना पड़ा, इनमें पहला संकट 2008 में और दूसरा 2011 में उत्पन्न हुआ। सिंह ने कहा कि 2004-05 से 2009-10 के बीच गरीबी इससे पहले के 10 वर्षों की तुलना में दोगुनी गति कम हुई जबकि 11वीं योजनावधि में कषि की वृद्धि दर 3.3 फीसदी रही जो 10वीं योजना में दर्ज 2.4 फीसदी की वृद्धि के मुकाबले बहुत अधिक है। बाहरवीं योजनावधि के दौरान वृद्धि का लक्ष्य नौ फीसदी से घटाकर 8.2 फीसदी करने के संबंध में उन्होंने कहा कि वैश्विक हालात को देखते हुए अनुमान में थोड़ी कमी व्यावहारिक है।
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टिप्पणियाँ
टिप्पणियॉ पढ़े(7)
sheela dikshit madam or un jaise politician kehte hai ki lpg or diesel ka dam badna achha hain, kyun ? Kyun ki agar inke dam ab bade hai to salary bhi to badi wo bhi itne samay pehle, par koi unse or un jaise politician se ye puche ki ki salary kiski badi, 6th pay comminssion to sirf government employees ke hi laga kya unhe ye nahin malun mi aaj ke samay mein 50% se jyada log Sector mein kamakar apna ghar apni roji roti chala rahe Ek aadmi Sector mein aaj bhi apne career ki shuruaat 3000-4000 Se hi karta hai or 2 saal ke bad bhi use sirf Ka icreament milta hain , Sector ke logo ke liye kyun nahin pay commission lagte ki unki is mehangai ke jamane mein kam se kam Salary to mile jisse wo bhi apne ghar achhe se chala sake, apne bacchhon ko achhi education
By hindustan wasi (15th-September-2012 05:40:PM)
sheela dikshit madam or un jaise politician kehte hai ki lpg or diesel ka dam badna achha hain, kyun ? Kyun ki agar inke dam ab bade hai to salary bhi to badi wo bhi itne samay pehle, par koi unse or un jaise politician se ye puche ki ki salary kiski badi, 6th pay comminssion to sirf employees ke hi laga kya unhe ye nahin malun mi aaj ke samay mein 50% se jyada log Sector mein kamakar apna ghar apni roji roti chala rahe Ek aadmi Sector mein aaj bhi apne career ki shuruaat 3000-4000 Se hi karta hai or 2 saal ke bad bhi use sirf Ka icreament milta hain , Sector ke logo ke liye kyun nahin pay commission lagte ki unki is mehangai ke jamane mein kam se kam Salary to mile jisse wo bhi apne ghar achhe se chala sake, apne bacchhon ko achhi education
By hindustan wasi (15th-September-2012 05:37:PM)
sheela dikshit madam or un jaise politician kehte hai ki lpg or diesel ka dam badna achha hain, kyun ? Kyun ki agar inke dam ab bade hai to salary bhi to badi wo bhi itne samay pehle, par koi unse or un jaise politician se ye puche ki ki salary kiski badi, 6th pay comminssion to sirf employees ke hi laga kya unhe ye nahin malun mi aaj ke samay mein 50% se jyada log Sector mein kamakar apna ghar apni roji roti chala rahe Ek aadmi Sector mein aaj bhi apne career ki shuruaat 3000-4000 Se hi karta hai or 2 saal ke bad bhi use sirf Ka icreament milta hain , Sector ke logo ke liye kyun nahin pay commission lagte ki unki is mehangai ke jamane mein kam se kam Salary to mile jisse wo bhi apne ghar achhe se chala sake, apne bacchhon ko achhi education
By shelakrati@yahoo.com (15th-September-2012 05:35:PM)
यह सरकार भिराश्ताचार को
तो ख़तम नही कर सकती मगर गरीबो को ख़तम करने पर उतारू हे, हमारे देश के प्रधान मंत्री संसेक्स से देश की उचाई को नाप रहे हे उनको यह भी जानना चाहिय कितने लोग देश का संसेक्स में रूचि रखते हे और कितने लोग इसको जानते हे केर्पिया पहले अपने बिरष्ट नातेओ पर तो लगाम लगये आज का आम आदमी दो जून की रोटी के लिए मजबूर हे और नेताओ की मौज आ रही हे लगता हे अब तो पेर्जतेंत्र की प्रिभेशा ही बदल जायगी डेमोक्रेसी इस डा गोव्मेंत्मेंट ऑफ़ दी नेताजी फॉर दी नेताजी बाई दी
By Mohammad shan alam (15th-September-2012 02:56:PM)
अबे मनमोहन तेरे को ये बता हे की गरीबी बड़ी हे या कम हुयी हे तेरे को कुछ भी पता नहीं तेरे ये जो डाटा हे सब फर्जी हे जेसे की तू फर्जी हे तू तो इस देस को कतम करके ही दम लेगा तुम्हारी धन्दाली जनता के सामने आ गयी हे अब जनता इसका हिसाब चुनाव में करेगी और ये जो ममता हे इसका भी हिसाब जनता करेगी
By raj (15th-September-2012 02:45:PM)
अबे सपेदे अवकात में हो जा वरना क्रांति को हवा मत दे नहीं तो बाद में
By ahmad (15th-September-2012 02:19:PM)
अभी तक तो देश के भ्रष्ट नेता और उनके अपने ही लोग लूट मचाते रहे हे अब विदेशी निवेश को बढावा दे कर विदेशियों को लूट का मौक़ा देना चाहते हे प्रधान मंत्री
By PRABHUDAYAL (15th-September-2012 02:02:PM)
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