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मनरेगा की हालत से चिंतित मनमोहन
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:14-07-12 07:21 PM
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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शनिवार को इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के समवर्ती मूल्यांकन की स्थिति ठीक नहीं। प्रधानमंत्री ने योजना आयोग को त्रुटियों और कमियों को दूर करने का निर्देश दिया है।

प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि जिस तरह से यह योजना कार्य कर रही है वह उससे पूर्ण रूप से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने सरकार की इस प्रमुख योजना के तहत कार्यरत श्रमिकों को विलंबित भुगतान जैसी समस्याएं गिनाते हुए कहा कि इनका जल्द समाधान होना चाहिए।

सिंह ने संप्रग की प्रमुख योजना मनरेगा के अनुसंधान अध्ययन के संकलन मनरेगा समीक्षा को जारी करने के अवसर पर दिये अपने संबोधन में कहा कि महात्मा गांधी नरेगा के आंकड़ों की कहानी उसकी सफलता बयान करती है..समग्रता के मामले में यह एक सफल योजना है..हाल में किसी अन्य कल्याणकारी योजना ने लोगों का ध्यान उतना आकर्षित नहीं किया जितना कि मनरेगा ने किया है। उन्होंने कहा कि लेकिन आंकड़े पूरी सच्चाई नहीं बताते।

मनरेगा समीक्षा उस मनरेगा योजना के बारे में किये गए अनुसंधान अध्ययनों का एक संग्रह है जिसके तहत 1200 करोड़ लोगों को वेतन का भुगतान करने के लिए 1,10,000 करोड़ रुपये व्यय किये गए हैं।

सिंह ने कहा कि उन्हें (ग्रामीण विकास मंत्री) जयराम रमेश से यह सुनकर आश्चर्य होता है कि समवर्ती लेखापरीक्षण प्रक्रियाएं अच्छी हालत में नहीं हैं। उन्होंने रमेश और योजना आयोग के सदस्य मिहिर शाह की ओर से रेखांकित की गई कमियों का उल्लेख किया जिन्हें दूर किये जाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि मुझे नहीं पता कि यदि वे सुस्त हैं, तो क्यों सुस्त हैं लेकिन मैं (योजना आयोग के उपाध्यक्ष) मोंटेक सिंह आहलूवालिया से अनुरोध करूंगा कि वह इस कमी को दूर करने में भी अपना दिमाग लगायें। इस कार्यक्रम में रमेश और आहलूवालिया दोनों उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री ने स्मरण करते हुए कहा कि जब वह योजना आयोग में थे तब ग्रामीण विकास के कई कार्यक्रमों का समवर्ती मूल्यांकन कार्यक्रम शुरू किया गया था। उन्होंने मनरेगा योजना में कार्यरत श्रमिकों को भुगतान में होने वाले विलंब के मुद्दे का उल्लेख करते हुए कहा कि हम जल्द ही भुगतान में विलंब की समस्या को दूर कर लेंगे, मेरा मानना है कि निकट भविष्य में बेहतर परिणाम सामने आएंगे।

समीक्षा में मनरेगा को लागू करने में कोष के गबन जैसे मुददों को लेकर रमेश की स्वीकारोक्ति है। उन्होंने लिखा है कि यद्यपि मनरेगा की उपलब्धियां शानदार रहीं हैं लेकिन इसके कार्यान्वयन के संबंध में कुछ मुद्दे रहे हैं जिनकी पहचान करके उनका सार्थक रूप से समाधान किये जाने की जरूरत है। मनरेगा में राशि एवं संसाधनों के गबन और गलत इस्तेमाल को लेकर सार्वजनिक चिंता रही है।

सिंह ने रमेश की ओर से मनरेगा में किये गए इस उल्लेख का हवाला दिया कि मनरेगा विश्व में सबसे बड़ा एवं महत्वाकांक्षी सामाजिक सुरक्षा एवं सार्वजनिक निर्माण कार्यक्रम है।
 
 
 
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