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प्रणब के पैतृक गांव ने किया अपने ‘पोल्टू’ का स्वागत
मिराती (पश्चिम बंगाल), एजेंसी
First Published:23-06-12 10:52 PM
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केंद्रीय वित्त मंत्री और राष्ट्रपति पद के संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी शनिवार को अपने पैतृक गांव पहुंचे, जहां उनके रिश्तेदार, पड़ोसी, प्रशंसक और मित्र उनके स्वागत में पलक-पांवड़े बिछाए हुए थे।

पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के इस शांत गांव मिराती में लोग सुबह से ही अपनी माटी के उस लाल के पहुंचने की प्रतीक्षा कर रहे थे जो राज्य के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जो राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं। इस गांव में प्रणब का जन्म 1935 में हुआ था। उनके आवास तक सड़क के दोनों ओर सैकड़ों लोग उनकी एक झलक पाने के लिए बेताब नजर आए।

76 वर्षीय नेता जैसे ही अपनी कार से उतरे, उनके आगे 200 मीटर लम्बी लाल दरी थी जो उनके पैतृक घर तक बिछी हुई थी। लोगों ने उन पर पुष्पवर्षा की और महिलाओं ने उनके प्रति एकता दिखाते हुए शुभध्वनि निकाली तथा शंख बजाए। प्रणब के विधायक बेटे अभिजीत ने अपने पिता के लिए लोगों से समर्थन मांगा। उन्होंने कहा, ‘एक बेटे के रूप में मैं चाहता हूं कि प्रत्येक व्यक्ति राष्ट्रपति चुनाव में मेरे पिता को समर्थन दे।’

‘प्रणब बाबू जिंदाबाद’ के नारे के बीच राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार ने पांच फुट लंबी फूलों की माला ग्रहण की। उनके चेहरे पर मुस्कान खिली थी। लोगों से मुखातिब होकर उन्होंने कहा, ‘मैं आप में से ही एक हूं।’ पूरे गांव में खुशी का माहौल था। जनजातीय महिलाओं ने अपनी पारंपरिक वेश-भूषा में नृत्य किया और संगत देने वाले कलाकारों ने ढोल व अन्य वाद्ययंत्र बजाए।

एक बुजुर्ग ने कहा, ‘वह भले ही देश के नेता बन जाएं मगर हमारे लिए तो वह पोल्टू (उपनाम) ही रहेंगे। मैं उन्हें शुभकामना देने आया हूं।’ परिवार की अधिष्ठात्री देवी दुर्गा की पूजा के बाद प्रणब अपनी बड़ी बहन अन्नपूर्णा बनर्जी से मिलने पास के गांव किरनाहर गए जो कोलकाता से 170 किलोमीटर दूर है। वहां उनके स्वागत के लिए हजारों लोग जुटे थे।

प्रणब ने बचपन में किरनाहर शिव चंद्र ब्यॉयज स्कूल में पढ़ाई की थी। वहां के प्रिंसिपल ने उन्हें माला पहनाई, जबकि अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने अपने पोल्टू को रेशमी चादर भेंट की। बीरभूम पुलिस ने उनके सम्मान में गार्ड ऑफ ऑनर पेश किया और सलामी दी।

इसके बाद प्रणब ने अपनी बड़ी बहन के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। भाई के सिर पर हाथ रख बुजुर्ग अन्नपूर्णा ने कहा, ‘आय बाबा, घोरे आय (भाई, घर के अंदर आओ)।’ बहन के घर में प्रवेश करने से पहले प्रणब दा ने बाहर में जुटी भीड़ का हाथ हिलाकर अभिवादन किया और उनसे कहा कि वह चार दशक लंबी अपनी राजनीतिक जीवन यात्रा को विराम देने के लिए 26 जून को मनमोहन सिंह सरकार से इस्तीफा देने जा रहे हैं।

 
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