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शिवसेना और जदयू को मनाने में जुटी भाजपा
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:18-06-12 06:57 PM
Last Updated:18-06-12 09:14 PM
पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के शीर्ष संवैधानिक पद का चुनाव लड़ने से इंकार कर दिए जाने पर भाजपा अब पीए संगमा को समर्थन देने पर विचार कर रही है। वह अपने दो सहयोगी दलों शिव सेना और जदयू को इस बात के लिए मनाने का प्रयास कर रही है कि वे संप्रग के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी को सर्वसम्मत प्रत्याशी बनाने के अपने रुख को छोड़ दें।
भाजपा नेता, खासतौर पर लालकृष्ण आडवाणी और सुषमा स्वराज कलाम के कद और राजग तथा उसके बाहर के दलों में भी उनकी स्वीकार्यता को देखते हुए उन्हें मुखर्जी के खिलाफ उतारने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन कलाम ने सार्वजनिक रूप से आज यह घोषणा करके उनके अरमानों पर पानी फेर दिया कि मुखर्जी के खिलाफ प्रत्याशी बनने की उनकी अंतरात्मा अनुमति नहीं देती।
आडवाणी पिछले कुछ दिन से लगातार फोन पर कलाम के संपर्क में थे। आज उन्होंने पार्टी नेता एवं अपने करीबी सुधीन्द्र कुलकर्णी को दो बार कलाम के पास भेजा। उन्होंने भी फोन पर कलाम से बात की लेकिन कलाम नहीं माने।
सूत्रों ने बताया कि आडवाणी ने कलाम से कहा कि वह अपने फैसले के बारे में बयान कुछ विलंब से दें लेकिन कलाम ने इस मसले पर सभी अटकलों को तुरंत विराम देना तय किया।
कलाम के फैसले से झटका खायी भाजपा ने तय किया कि वह कोर समूह की बैठक बुलाएगी जिसमें नये घटनाक्रम और भावी रणनीति के बारे में फैसला किया जाएगा। यह पूछने पर कि पार्टी अब क्या करना चाहती है, भाजपा प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने कहा कि जो भी फैसला किया जाएगा, हम मीडिया को अवगत कराएंगे। भाजपा अकेले नहीं है। इस मुद्दे पर राजग में चर्चा होगी और लोकतांत्रिक तरीके से फैसला होगा।
राजग की एक बैठक कल हो रही है। इससे पहले इस मुद्दे पर राजग की दो बैठकें हो चुकी हैं। सूत्रों ने बताया कि अब जदयू संभवत: इस बात पर और अड़ जाएगा कि प्रणब के मुकाबले किसी को न उतारा जाए। जदयू सूत्रों का कहना है कि संगमा का कद कलाम जितना नहीं है।
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टिप्पणियाँ
टिप्पणियॉ पढ़े(3)
विपक्ष को इतना कमजोर नहीं होना चाहिए, आज में आपसी तालमेल का आभाव है, कभी कभी ऐसा लगता है की हमारे पास विपक्ष है ही आज क्षेत्रीय दल राष्ट्रीय डालो पर भरी पड़ रहे अगर आज भी ऐ अपने को नहीं बदल पाए तो शायद जनता इन्हें भी भूल आज तक भाजपा ने अपना नेता तक नहीं चुना है तो और क्या कर
By santosh (19th-June-2012 01:11:PM)
भा ज पा में नैतिकता चाहेयेऔर तालमेल का आभाव है क्या सर्वसम्मत से प्रणव मुखर्जी को चुना जाना सही नहीं है कल को बीजेपी का भी प्र म बन सकते है तब क्या तकरार नहीं होगा बीजेपी को चाहिय बंद मुट्ठी लाख की अभी सर्व सम्मति से चुने बदले में उप राष्ट्रपति की मांग कर ले वर्ना इधर के रहेगे न उधर के प्र म ने भी समथन मग है अब फैसला कर लेना
By praveen jha (18th-June-2012 08:45:PM)
President ka pad ek gair rajnetik pad hai esme es prakar ki atkale bahut aachi nahi desh k liye
By Pradeep shukla (18th-June-2012 08:35:PM)
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