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रतन टाटा से भी मांगी गई थी रिश्वत
देहरादून, एजेंसी
First Published:15-11-10 06:58 PM
Last Updated:15-11-10 10:59 PM
टाटा उद्योग समूह देश में फिर अपनी विमानन कंपनी इसलिए शुरू नहीं कर पाया क्योंकि उसने एक मंत्री को 15 करोड़ रुपये की रिश्वत देना मुनासिब नहीं समझा।
टाटा समूह के मुखिया और देश के प्रमुख उद्योगपति रतन टाटा ने एक व्याख्यान में अपने सीने में छिपे इस दर्द को सार्वजनिक करते हुए कहा कि देश में एयरलाइन उद्योग के अग्रदूत होने के बावजूद टाटा समूह को इस उद्योग में निजी कंपनियों को प्रवेश दिए जाने के दौर में विमानन सेवा का लाइसेंस लेने के लिए अड़चने आती रहीं। उल्लेखनीय है कि टाटा घराना सिंगापुर एयरलाइंस के साथ मिलकर विमानन सेवा शुरू करना चाहता था।
टाटा ने कहा कि हमने इस बारे में तीन तीन प्रधानमंत्रियों से संपर्क किया था, लेकिन एक व्यक्ति ने विमानन कंपनी शुरू करने के हमारे सारे प्रयासों पर पानी फेर दिया। टाटा ने हालांकि उस व्यक्ति विशेष का नाम नहीं लिया। उन्होंने बताया कि इस मामले में पर चुटकी लेते हुए एक अन्य उद्योगपति ने उनसे कहा कि आप नासमझ हैं, एक मंत्री 15 करोड़ रुपये मांग रहा था आपने क्यों नहीं दे दिया।
घटना को याद करते हुए टाटा ने बताया कि मैं 15 करोड़ रुपये की रिश्वत देकर विमानन कंपनी शुरू नहीं करना चाहता था। रतन टाटा ने के पूर्ववर्ती जेआरडी टाटा ने देश में पहली वाणिज्यिक एयरलाइंस कंपनी टाटा एयरलाइंस 1930 में शुरू की थी। इसे बाद में 1950 के दशक में सरकार ने अपने जिम्मे ले लिया और यही बाद में एयर इंडिया बना।
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