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वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए नवोन्मेष जरूरी: राष्ट्रपति
कोलकाता, एजेंसी
First Published:03-01-13 03:41 PM
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज एक ऐसी शैक्षिक प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया, जिसमें वैज्ञानिक संस्कृति का बोलबाला हो और वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धा के लिए नवोन्मेष पर ज्यादा ध्यान दिया जाए।
राष्ट्रपति ने वैज्ञानिक तबके का आहवान किया कि वह एक समयसीमा के भीतर काम करने की प्रणाली विकसित करे ताकि भारत विज्ञान का नोबेल पुरस्कार जीत सके। उन्होंने कहा कि भारत को 83 साल पहले भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था और यह प्रख्यात वैज्ञानिक सी़ वी़ रमण को दिया गया था।
मुखर्जी ने कहा कि हमें एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की जरूरत है जो समाज में वैज्ञानिक संस्कति के विकास को अहमियत देती हो।
भारतीय विज्ञान कांग्रेस के 100वें सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि बदलाव के आयामों के प्रबंधन के लिए लोगों की ज्ञान की क्षमता के विकसित हुए बिना महज आर्थिक वद्धि न तो पर्याप्त है और न ही उचित।
इस संदर्भ में उन्होंने नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों का उदाहरण दिया जिसमें मूल्य आधारित समग्र शिक्षा पर ध्यान दिया जाता था। राष्ट्रपति ने कहा कि कृषि, विनिर्माण एवं मूल्य आधारित सेवाओं में युवाओं की उत्पादक भागीदारी देश के संतुलित विकास की कुंजी है।
राष्ट्रपति ने वैज्ञानिक तबके का आहवान किया कि वह एक समयसीमा के भीतर काम करने की प्रणाली विकसित करे ताकि भारत विज्ञान का नोबेल पुरस्कार जीत सके। उन्होंने कहा कि भारत को 83 साल पहले भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था और यह प्रख्यात वैज्ञानिक सी़ वी़ रमण को दिया गया था।
मुखर्जी ने कहा कि हमें एक ऐसी शिक्षा प्रणाली की जरूरत है जो समाज में वैज्ञानिक संस्कति के विकास को अहमियत देती हो।
भारतीय विज्ञान कांग्रेस के 100वें सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि बदलाव के आयामों के प्रबंधन के लिए लोगों की ज्ञान की क्षमता के विकसित हुए बिना महज आर्थिक वद्धि न तो पर्याप्त है और न ही उचित।
इस संदर्भ में उन्होंने नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों का उदाहरण दिया जिसमें मूल्य आधारित समग्र शिक्षा पर ध्यान दिया जाता था। राष्ट्रपति ने कहा कि कृषि, विनिर्माण एवं मूल्य आधारित सेवाओं में युवाओं की उत्पादक भागीदारी देश के संतुलित विकास की कुंजी है।
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