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महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:22-07-12 02:52 PM
Last Updated:22-07-12 11:29 PM
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रायसीना हिल्स प्रणब मुखर्जी के स्वागत को तैयार है। प्रणब को आज देश का नया राष्ट्रपति चुन लिया गया और उनके हिस्से सात लाख 13 हजार 763 मत मूल्य आए जबकि भाजपा समर्थित प्रतिद्वंद्वी पीए संगमा को तीन लाख 15 हजार 987 मत मूल्य हासिल हुए।

देश का अगला राष्ट्रपति चुने जाने के बाद प्रणब ने कहा कि देश भर से मिले समर्थन के लिए वह सभी के आभारी हैं। प्रणब ने अपने आवास के बाहर संवाददाताओं से कहा कि पूरे देश से मुझे जबर्दस्त समर्थन मिला है जिसके लिए मैं सभी का आभारी हूं। उन्होंने कहा कि मेरे पांच दशक के राजनीतिक जीवन में जितने लोगों ने मुझे सहयोग और समर्थन किया है उन सभी को मैं धन्यवाद देता हूं।

प्रणब ने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में संविधान का संरक्षण और उसे बचाना उनकी जिम्मेदारी होगी। संगमा द्वारा बधाई दिए जाने की खबर पर प्रणव ने कहा कि वह संगमा का भी धन्यवाद करते हैं।

इस महीने की 19 तारीख को हुए चुनाव में 776 सासंदों में से 748 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया जिसमें से प्रणब को 527 और संगमा को 206 सांसदों ने मत दिया। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव सहित 15 सांसदों के मत अयोग्य करार दिए गए। मौजूदा राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल को 1000 सैनिकों की सलामी के साथ बुधवार 25 जुलाई को विदाई दी जाएगी और प्रणब संसद के केन्द्रीय कक्ष में नये राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे जिसके बाद वही 1000 सैनिक अपने नए मुख्य सेनापति को सलामी देंगे।

जीत के साथ प्रणब मुखर्जी देश के शीर्ष संवैधानिक पद पर 13वें व्यक्ति और 14वें राष्ट्रपति होंगे। डा राजेन्द्र प्रसाद दो बार इस पद के लिए चुने गए थे। प्रणब के जीत के लिए जादुई आंकड़ा पार होने की घोषणा के कुछ समय बाद ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी महासचिव राहुल गांधी ने प्रणब दा को उनके मौजूदा 13 तालकटोरा रोड स्थित आवास पर जाकर बधाई दी। बधाई देने वालों में कई राजनीतिक दल, सांसद, विधायक, केन्द्रीय मंत्री, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव आदि शामिल थे।

उनके पुत्र अभिजीत मुखर्जी ने पिता की जीत पर कहा कि उन्हें (प्रणब को) अपनी जीत का विश्वास शुरू से ही था और वह राष्ट्रपति के रूप में अपनी भूमिका साबित करेंगे। उन्हें इस बात का अफसोस नहीं है कि वह प्रधानमंत्री नहीं बन पाए लेकिन अब वह राष्ट्रपति बने हैं जो समान रूप से और संवैधानिक रूप से सर्वोच्च पद है।
 
भारत और भारतीयता के ताने बाने को पूरी तत्परता और तार्किकता से समझने में सक्षम राजनीति के शब्दकोश, सत्ता के गलियारों में मान्य संकटमोचक, प्रशासक और दलों की सीमा के पार अपनी स्वीकार्यता के संवाहक प्रणब कुमार मुखर्जी के देश का राष्ट्रपति चुने को सुखद संकेत ही माना जाएगा।

दलीय सीमाओं से परे उनकी स्वकार्यता ने ही विपक्षी गठबंधन राजग में राग द्वेष खड़े हो गए और जद-यू शिवसेना जैसे धुर विरोधी उनके समर्थन में उनके सिरहाने खड़े हैं। और तो और अरुण जेटली जैसे प्रखर विरोधी भी जब उनकी तुलना क्रिकेट के योद्धा सर डान ब्रैडमैन से से करने लगे तो यह संतोष हो जाता है कि देश में शीर्ष संवैधानिक पद प्रथम नागरिक और अपना सर्वोच्च सेनापति वाकई सक्षम और सुधि हाथों में है।

राष्ट्रपति पद की चुनावी दौड़ में शुरुआत से ही कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले। संप्रग की प्रमुख घटक तृणमूल कांग्रेस ने काफी ना नुकुर के बाद अंतत: प्रणब की उम्मीदवारी पर समर्थन दे दिया। उधर राजग के घटक जदयू और शिवसेना ने भी मुखर्जी का समर्थन किया।

भले ही प्रणव दा को महज विरोध के लिए विरोध के नाम पर पीए संगमा से मुकाबला करना पड़ा हो पर उनका अनुभव उनको जीत के लिए बहुत पहले आश्वस्त कर चुका था। तभी तो उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें राष्ट्रपति भवन का लॉन काफी पसंद है। मुझे सुबह टहलने की आदत है। मैं अपने लॉन में 30-40 चक्कर लगाता हूं। राष्ट्रपति भवन का लॉन काफी बड़ा है। किसी को इतने चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी।

वह पहली बार 1969 में राज्यसभा के लिए चुने गए। एक बार राज्यसभा की ओर गए तो कई वर्षों तक जनता के बीच जाकर चुनाव नहीं लड़ा। सियासी जिंदगी में करीब 35 साल बाद उन्होंने लोकसभा का रुख किया। 2004 में वह पहली बार पश्चिम बंगाल के जंगीपुर संसदीय क्षेत्र से चुने गए। 2009 में भी वह लोकसभा पहुंचे।

अस्सी के दशक में प्रधानमंत्री पद की हसरत का इजहार करने के बाद उन्होंने कांग्रेस से बगावत कर दी थी। बाद में वह फिर से कांग्रेस में आए और सियासी बुलंदियों को छूते चले गए।
 अर्थव्यवस्था से लेकर विदेश मामलों पर पैनी पकड़ रखने वाले 77 वर्षीय प्रणब सियासत की हर करवट को बखूबी समझते हैं। यही वजह रही कि जब भी उनकी पार्टी और मौजूदा संप्रग सरकार पर मुसीबत आई तो वह सबसे आगे नजर आए। कई बार तो ऐसा लगा कि सरकार की हर मर्ज की दवा प्रणव बाबू ही हैं।

 
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टिप्पणियाँ
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टिप्पणियॉ पढ़े(9)
praban da ko desvasiyon ka aabhari nahi hona kyoki deshvasiyo dvara unhe rashtrapati nahi cuna gaya deshvasiyon ko rashtrapati chunane ka moka diya jata to raqshtrapati koi or desh ka gorav badhane vala vyakti to keval un sansado ko aabhari hana chahie jinhone unhe vote kiy kiya
By s. n. vyas (23rd-July-2012 01:41:PM)
देश का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है ,,,,, जहाँ राष्ट्रपति की कुर्सी ,,,, वोट के बदले नोट ( आर्थिक पॅकेज) से कांग्रेस को प्राप्त हुई है ,,,,,, राष्ट्रपति भवन कांग्रेसी अड्डा तो था ही अब खरीद-फरोख्त का धंधा का अड्डा बन जायेगा ,,,,,
By Ram Sattan (23rd-July-2012 10:30:AM)
प्रणव मुखर्जी का राष्ट्रपति चुना जाना भारत जनतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है ,क्यूकि राष्ट्रपति पद लिए एक साफ़ सुथरी छवि का व्यक्ति होना चाहिए न की "राजनीति का चाणक्य "| agar कोई राज्निताघ्या भारत का राष्ट्रपति निर्वाचित किया जाता है | तो वह इस गरिमामयी पद पर aaseen रहते hue राजनीती से ओतप्रोत फैसले ही करेगा न की निष्पक्षता दिखायेगा | और वैसे भी प्रणब दा तो है ही "राजनीति का चाणक्य "??????
By Aditya Gautam  (23rd-July-2012 10:15:AM)
बहुत दुःख की बात है की एक भ्रष्ट नेता राष्ट्रपति बन गया जो लोग दिल से बधाई दे रहे है वो लोग पहले अपने जमीर से पूछे क्या दादा भ्रष्ट नहीं है?अच्छे लोग अब राजनीती में नहीं अनाचाहते क्यों की अच्छे लोगो को कोई नहीं वोट करता लोग केवल अपने निजी लाभ (जाती,धर्म,पैसे) के आभार पर वोट करते है आज हर एक नेता अपराधी है क्यों ? क्योकि आज एक अपराधी ही नेता बन सकता है Abdul Kalam, जी जैसे लोग जिन में अपराधी जैसे गुड़ नहीं है इसी लिए उनोने अपना नाम देने दे इंकार कर
By Brijesh (23rd-July-2012 09:09:AM)
प्रणब मुखर्जी का भारत का प्रेसिडेंट बनना bahut शुभ संकेत है हमें खुले दिल उनका समर्थन करना chahiye कुछ लोग सिर्फ सनसनी फ़ैलाने और अपने स्वर्थ्य ke लिए उनकी आलोचना kar रहे हैं जो ठीक नहीं है लोगों को इन सिरफिरों की बैटन मैं नहीं आना चाहीहे उनका देश सेवा भाव sarahaniya रहा है उन्हें अपने अछे कार्यों का सही इनाम मिला है इसकेलिए श्रीमती सोनिया गाँधी व उनके sabhi सहयोगियों को बधाई देता हूँ क्यूंकि उनुहूने उन्हें candidate चुना और जिताया प्रणबजी को मेरी दिल से badhayi
By DS Koranga (22nd-July-2012 10:45:PM)
pranav da jaise yogya ka president select hona desh ke liye garv ki bat hai,par ab samay hai pranav da ke liye apni yogyta sabit karne ka,pranav da aapse savinay nivedan hai ki please desh ke crruption ko khatam karne keliye please hard decision
By amit (22nd-July-2012 09:51:PM)
में मुख जी को राष्ट्रपति बन्ने पर हार्दिक बड़े
By murari lal (22nd-July-2012 09:34:PM)
परसनल यूजर id से तत्काल टिकट बंद करने से क्या हुआ है| अब रेलवे के कुछ दलालों के द्वारा यात्री और ठगे जा रहे है| भारत में बहुत लोग अपना टिकट खुद बना सकते है |
By subodh kumar (22nd-July-2012 06:03:PM)
proud feeling for my hind
By Aditya Kumar (22nd-July-2012 05:58:PM)
 
 

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