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प्रत्यक्ष विदेश निवेश पर विपक्ष में वोट करेगी समाजवादी पार्टी
नई दिल्ली, लाइव हिन्दुस्तान First Published:05-12-2012 10:14:17 AMLast Updated:05-12-2012 12:03:45 PM

मल्टी ब्रांड रिटेल में एफडीआई के मुद्दे पर लोकसभा में वोटिंग से पहले समाजवादी पार्टी ने एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में पहली बार साफ किया है कि वह सरकार के पक्ष में वोट नहीं देगी।

चैनल से बातचीत में समाजवादी पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव ने साफ कहा है कि सदन में वोटिंग के वक्त या तो वे सरकार के खिलाफ वोट देंगे या फिर सदन में मौजूद नहीं होंगे।

इससे पहले, मंगलवार को मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई के फैसले को वापस लेने की जोरदार वकालत करते हुए समाजवादी पार्टी नेता मुलायम सिंह यादव ने सरकार को आगाह किया कि यदि उसने कदम पीछे नहीं खींचे, तो उसे आगामी आम चुनाव में भारी नुकसान होगा और बीजेपी सत्ता में आ जाएगी।

मुलायम ने इसके साथ ही इस मसले पर सर्वदलीय बैठक बुलाकर देश के विकास के लिए ठोस ढांचा तैयार किए जाने की वकालत की। एफडीआई का कड़ा और स्पष्ट विरोध करते हुए मुलायम ने भावी चुनावी समीकरणों का संकेत देते हुए कहा कि वह या तो कांग्रेस को समर्थन देंगे या फिर समर्थन लेंगे।

मुलायम ने एफडीआई की पृष्ठभूमि में आगामी आम चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस को आगाह करते हुए कहा, चुनाव आ रहा है। ये (बीजेपी) चालाक लोग हैं। गांव-गांव में संघ (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) फैला हुआ है। आपको (कांग्रेस) चुनाव की दृष्टि से भी कोई लाभ नहीं होगा। ये (बीजेपी) सत्ता में आ जाएगी। हम तो आने वाले नहीं हैं। हम तो सहयोग देंगे या लेंगे।

उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से एफडीआई के फैसले को कुछ समय के लिए टालने का आग्रह करते हुए कहा कि अगर फायदा मिलता दिखेगा, तो हम भी समर्थन कर देंगे, लेकिन अभी इसे छोड़ दीजिए।

लोकसभा में मंगलवार को सरकार का पक्ष रखते हुए सिब्बल ने विपक्ष के आरोपों का सिलसिलेवार जवाब तो दिया ही, इस बात को साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि यह फैसला देशहित में है।

लोकसभा में मतदान के नियम (184) के तहत हुई बहस में सरकार को बाहर से समर्थन दे रही सपा और बसपा ने खुदरा क्षेत्र में एफडीआई का विरोध किया। मगर यह संकेत नहीं दिए कि इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ वोट कर सकती हैं।

इससे पहले एफडीआई वापस लेने का प्रस्ताव पेश करते हुए सुषमा स्वराज ने बहस की शुरुआत करते हुए कहा कि इसके परिणाम बेहद घातक होंगे। दुनिया के विकसित देश छोटे व्यापारियों को बढ़ावा दे रहे हैं इसलिए सरकार फैसले पर फिर से सोचे।

 
 
 
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