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FDI पर अपनी जिद छोड़े यूपीए सरकार: भाजपा
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:27-11-12 12:17 PMLast Updated:27-11-12 01:00 PM
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बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआई के मुद्दे पर मत विभाजन के प्रावधान के तहत चर्चा कराने की मांग पर अड़ी भाजपा ने मंगलवार को सरकार से जिद छोड़ने और संसद में सुचारू रूप से कामकाज चलाने का मार्ग प्रशस्त करने की मांग की।
   
आज भाजपा संसदीय पार्टी की बैठक में एफडीआई के मुद्दे पर कल सर्वदलीय पार्टी की बैठक एवं कुछ अन्य विषयों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद भाजपा प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने संवाददाताओं से कहा कि बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआई के मुद्दे पर सरकार अपने आश्वासन पर कायम नहीं रही और अपने वायदे के मुताबिक सभी पक्षों से चर्चा नहीं की।

इसको देखते हुए सदन की राय मत विभाजन के जरिये ही जानी जा सकती है। पार्टी इस रूख पर कायम है कि एफडीआई पर नियम 184 के तहत चर्चा करायी जाए जिसमें मत विभाजन का प्रावधान है।
   
उन्होंने कहा कि सरकार जब तक नियम 184 के तहत चर्चा नहीं कराती है तब तक संसद नहीं चलने की जिम्मेदारी सरकार की मानी जायेगी। सरकार को जिद छोड़नी चाहिए और संसद सुचारू रूप से चलाने का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए।
   
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सरकार को सत्ता का मद छोड़ना चाहिए और विपक्ष की मांग मान लेनी चाहिए। भाजपा और राजग मत विभाजन के तहत चर्चा से कम कुछ भी स्वीकार करने को तैयार नहीं है।
   
मुख्य विपक्षी पार्टी ने संकेत दिया कि भाजपा और उसके सहयोगी तब तक संसद में कामकाज नहीं होने देंगे जब तक सरकार मत विभाजन के प्रावधान के तहत चर्चा कराने की उनकी मांग को नहीं मान लेती है।
   
भाजपा संसदीय पार्टी ने वालमार्ट के भारत में दुकान खोलने की अनुमति देने के बदले रिश्वत की मांग संबंधी आरोपों पर भी चर्चा की। बैठक के दौरान अविरल गंगा, निर्मल गंगा अभियान के बारे में चर्चा की गई। गंगा नदी के प्रवाह वाले इलाकों के सांसदों को दो दिसंबर को मानव श्रृंखला के दौरान उपस्थित रहने को कहा गया है।
   
बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र में एफडीआई के मुद्दे पर हंगामे के कारण शीतकालीन सत्र में संसद के दोनों सदनों में लगातार चौथे दिन प्रश्नकाल नहीं हो सका। भाजपा नीत राजग और वामदल मत विभाजन के प्रावधान के तहत चर्चा कराने की मांग पर अड़े है।
    
गौरतलब है कि कल लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा था कि अब गेंद सरकार के पाले में है और संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने का रास्ता उसे ही निकालना है।
   
कल सर्वदलीय बैठक के बाद लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा था कि हमारी पार्टी मत विभाजन के प्रावधान के तहत चर्चा कराने पर अडिग है और इस पर समझौते का सवाल ही नहीं है। यह चर्चा लोकसभा में नियम 184 के तहत और राज्यसभा में नियम 168 के तहत करायी जाए।
   
उन्होंने कहा था कि मतविभाजन के प्रावधान के तहत होने वाली चर्चा में ही राय व्यक्त की जा सकती है। यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा संसद की कार्यवाही नहीं चलने देगी, उन्होंने कहा था, जब मैं कह रही हूं कि समझौते का सवाल नहीं है, तो इसका कुछ मतलब होता है।

 
 
 
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