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राष्ट्रपति ने अतबीर की दया याचिका पर किया फैसला
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:04-12-12 02:17 PM
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने यह शीर्ष पद संभालने के बाद पहली बार सजा कम करते हुए एक अभियुक्त अतबीर की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।
एक सत्र न्यायालय ने अतबीर को 1996 में सौतेली मां, सौतेली बहन और सौतेले भाई की एक संपत्ति विवाद में हत्या करने के मामले में 2004 में मत्युदंड दिया था। उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने अगस्त 2010 में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था।
इस साल जून में गह मंत्रालय ने राष्ट्रपति को अतबीर की सजा आजीवन कारावास में बदलने की सिफारिश की थी। राष्ट्रपति कार्यालय की वेबसाइट द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति ने 15 नवंबर को इस दया याचिका का निबटारा करते हुए मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।
पांच नवंबर को राष्ट्रपति ने मोहम्मद अजमल कसाब को दया याचिका खारिज कर दी थी। कसाब को उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल अगस्त में मुंबई आतंकी हमला मामले में मृत्युदंड दिया था। राष्ट्रपति भवन के अनुसार, मुखर्जी ने नौ दया याचिकाओं को विचार करने के लिए गह मंत्रालय के पास भेजा है।
इन याचिकाओं में संसद हमला मामले में दोषी करार अफजल गुरू की दया याचिका भी शामिल है। राष्ट्रपति के पास अब केवल साइबन्ना निंगप्पा नतिकार की दया याचिका लंबित है। उच्चतम न्यायालय ने पत्नी और बेटी की हत्या के मामले में 2005 में नतिकार को मौत की सजा सुनाई थी। गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति सचिवालय को पांच नवंबर को अपने सिफारिश भेजी है।
एक सत्र न्यायालय ने अतबीर को 1996 में सौतेली मां, सौतेली बहन और सौतेले भाई की एक संपत्ति विवाद में हत्या करने के मामले में 2004 में मत्युदंड दिया था। उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने अगस्त 2010 में निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था।
इस साल जून में गह मंत्रालय ने राष्ट्रपति को अतबीर की सजा आजीवन कारावास में बदलने की सिफारिश की थी। राष्ट्रपति कार्यालय की वेबसाइट द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति ने 15 नवंबर को इस दया याचिका का निबटारा करते हुए मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।
पांच नवंबर को राष्ट्रपति ने मोहम्मद अजमल कसाब को दया याचिका खारिज कर दी थी। कसाब को उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल अगस्त में मुंबई आतंकी हमला मामले में मृत्युदंड दिया था। राष्ट्रपति भवन के अनुसार, मुखर्जी ने नौ दया याचिकाओं को विचार करने के लिए गह मंत्रालय के पास भेजा है।
इन याचिकाओं में संसद हमला मामले में दोषी करार अफजल गुरू की दया याचिका भी शामिल है। राष्ट्रपति के पास अब केवल साइबन्ना निंगप्पा नतिकार की दया याचिका लंबित है। उच्चतम न्यायालय ने पत्नी और बेटी की हत्या के मामले में 2005 में नतिकार को मौत की सजा सुनाई थी। गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति सचिवालय को पांच नवंबर को अपने सिफारिश भेजी है।
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