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पदोन्नति में आरक्षणः बसपा ने नहीं चलने दी संसद
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:12-12-12 07:11 PM
Last Updated:12-12-12 09:16 PM
सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों को पदोन्नति में आरक्षण का प्रावधान करने वाला विधेयक सदन की कार्यवाही बाधित होने के कारण नहीं पेश हो सकने से सख्त नाराज बसपा ने बुधवार को संसद की कार्यवाही नहीं चलने दी।
बसपा सदस्यों ने राज्यसभा में जहां पदोन्नति में आरक्षण मुद्दे पर नारेबाजी और हंगामा किया, वहीं लोकसभा में यह मुद्दा नहीं परंतु कोयला घोटाले को सामने रख इसी पार्टी के सदस्यों ने कार्यवाही नहीं चलने दी। बसपा प्रमुख मायावती ने राज्यसभा में विरोध की कमान खुद संभालते हुए सभापति हामिद अंसारी को निशाने पर लिया। उन्होंने सभापति से कहा कि दोपहर 12 बजे उनके (सभापति) के सदन से चले जाने के बाद कामकाज बाधित हो जाता है।
नाराज दिख रहीं मायावती ने अंसारी की तमाम अपीलों की अनुसनी करते हुए कहा कि वह कुछ भी सुनने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से सदन की कार्यवाही 12 बजे के बाद नहीं चलने दी जा रही है। उन्होंने अंसारी से कहा कि यह उनकी जिम्मेदारी है कि सदन में कामकाज सामान्य तरीके से हो। उन्होंने अंसारी से कहा कि 12 बजे आप चले जाते हैं। यह कैसा सदन है।
उन्होंने कहा कि सदन सुचारू रूप से चले, इसकी व्यवस्था कौन करेगा उन्होंने अंसारी से कहा कि सदन में कामकाज सामान्य तरीके से चले, यह जिम्मेदारी आपकी है।
हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे और लोकसभा की बैठक दो बार के स्थगन के बाद दोपहर तीन बजे दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी। मायावती ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा कि विधेयक पारित कराने का सही ढंग से प्रयास नहीं किया गया तो उनकी पार्टी और कड़े कदम उठाएगी। सदन में अपने आज के रुख को उन्होंने इस दिशा में पहला कदम करार दिया। उल्लेखनीय है कि विधेयक का विरोध कर रही सपा पिछले कुछ दिन से उच्च सदन की कार्यवाही लगातार बाधित करती आयी है। इस बीच भाजपा के मुख्य प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि हम चाहते हैं कि राज्यसभा का कामकाज सुचारू रूप से चले। राज्यसभा चर्चा की जगह है ताकि वहां कोई सदन में अपना नजरिया रख सके। सदन में चल रहे गतिरोध को दूर करने के लिए सरकार को पहल करनी चाहिए। प्रसाद ने कहा कि सपा और बसपा दोनों ही सरकार के समर्थक हैं। एक प्रत्यक्ष समर्थन कर रहा है तो दूसरा परोक्ष। सरकार के दोनों सहयोगियों के बीच गंभीर मतभेद हैं इसलिए कांग्रेस पार्टी ही इसे सुलझाये। हम चाहते हैं कि राज्यसभा की कार्यवाही सुचारू रूप से चले। विधेयक को लेकर सपा और बसपा के टकराव के बावजूद सरकार ने आज उम्मीद जताई कि संसद को सुचारू रूप से चलाने के लिए कोई न कोई समाधान निकल आएगा। संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने संवाददाताओं से कहा कि हम समाधान खोज लेंगे। हम धीरे-धीरे आगे बढ रहे हैं। सपा और बसपा द्वारा सदन की कार्यवाही में अकसर बाधा पहुंचाये जाने के बारे में पूछने पर कमलनाथ ने कहा कि दोनों सदन सुचारू रूप से चल पायें, यह सुनिश्चित करने के लिए वह सपा और बसपा दोनों से बात करेंगे। बसपा चाहती है कि सरकार राज्यसभा में विधेयक पेश करे लेकिन सपा का कहना है कि यह असंवैधानिक होगा और इससे 80 प्रतिशत सरकारी कर्मचारी पदोन्नति के अवसरों से वंचित हो जाएंगे। सपा सांसदों ने विधेयक पर चर्चा नहीं होने देने के लिए कमर कस ली है और उनका कहना है कि जरूरत पड़ी तो राज्यसभा की कार्यवाही हर रोज बाधित की जाएगी।
हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे और लोकसभा की बैठक दो बार के स्थगन के बाद दोपहर तीन बजे दिन भर के लिए स्थगित करनी पड़ी। मायावती ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा कि विधेयक पारित कराने का सही ढंग से प्रयास नहीं किया गया तो उनकी पार्टी और कड़े कदम उठाएगी। सदन में अपने आज के रुख को उन्होंने इस दिशा में पहला कदम करार दिया। उल्लेखनीय है कि विधेयक का विरोध कर रही सपा पिछले कुछ दिन से उच्च सदन की कार्यवाही लगातार बाधित करती आयी है। इस बीच भाजपा के मुख्य प्रवक्ता रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि हम चाहते हैं कि राज्यसभा का कामकाज सुचारू रूप से चले। राज्यसभा चर्चा की जगह है ताकि वहां कोई सदन में अपना नजरिया रख सके। सदन में चल रहे गतिरोध को दूर करने के लिए सरकार को पहल करनी चाहिए। प्रसाद ने कहा कि सपा और बसपा दोनों ही सरकार के समर्थक हैं। एक प्रत्यक्ष समर्थन कर रहा है तो दूसरा परोक्ष। सरकार के दोनों सहयोगियों के बीच गंभीर मतभेद हैं इसलिए कांग्रेस पार्टी ही इसे सुलझाये। हम चाहते हैं कि राज्यसभा की कार्यवाही सुचारू रूप से चले। विधेयक को लेकर सपा और बसपा के टकराव के बावजूद सरकार ने आज उम्मीद जताई कि संसद को सुचारू रूप से चलाने के लिए कोई न कोई समाधान निकल आएगा। संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने संवाददाताओं से कहा कि हम समाधान खोज लेंगे। हम धीरे-धीरे आगे बढ रहे हैं। सपा और बसपा द्वारा सदन की कार्यवाही में अकसर बाधा पहुंचाये जाने के बारे में पूछने पर कमलनाथ ने कहा कि दोनों सदन सुचारू रूप से चल पायें, यह सुनिश्चित करने के लिए वह सपा और बसपा दोनों से बात करेंगे। बसपा चाहती है कि सरकार राज्यसभा में विधेयक पेश करे लेकिन सपा का कहना है कि यह असंवैधानिक होगा और इससे 80 प्रतिशत सरकारी कर्मचारी पदोन्नति के अवसरों से वंचित हो जाएंगे। सपा सांसदों ने विधेयक पर चर्चा नहीं होने देने के लिए कमर कस ली है और उनका कहना है कि जरूरत पड़ी तो राज्यसभा की कार्यवाही हर रोज बाधित की जाएगी।
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टिप्पणियाँ
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reservation ek crime hai jo logo ke beech dooriya banata hai aur sikhata hai ki tum chote ho aur mein bada inshan ko apni knowledge aur labour ki dam par aage badana is tarah ke minister hi logo ko jaatiwad ke naam par bhadkaate hai logo ko is tarah ke minister ko kisi bhi post par lana hi nahi ek taraf to ye kahte hai ki hum aam janta ko ek nigah se dekhte hai wahi doosri taraf reservation ki baat karte hai raja ke liye sub ek saman hai phir reservation kis baat ko agar sabern bhi reservation ke liye kahege to kya unhe bhi reservation sarkar ko vote saari janta deti hai na ki reservation
By null (13th-December-2012 10:50:AM)
देश के बुद्धजीवियों जरा विचारणीय तथ्य है कि जिस आरक्षण को मण्डल आयोग लागू के पहले ओ बी सी तडपते रहे मण्डल आयोग लागू के बाद उन्हे अहसास हो गया कि आरक्षण का मतलब कोई खैरात या भीख नही बल्कि ये सदियो से वन्चितों के लिये अधिकार हासील कर पाने जैसा है । आज सपा मे अधिकांश सांसद ओबीसी के है एस सी के है क्योकर आरक्षण का इतना धूर विरोधी बन बैठे है ? बहन मायावती जी की जायज मांग का समर्थन करने से इन्कार क्यों कर रहे है ? इसके पीछे कौन सी ताकत काम कर रही है विचारणीय है जो आरक्षण से पद प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाले लोग ही आरक्षण के मुद्दे पर संसद का बहिर्गमन करते दिखाई दे रहे है आज प्रमोशन मे आरक्षण एस सी एस टी का मुद्दा है कल ओबीसी को भी इसकी आवश्यकता होगी । पदोन्नति हो या सीधी भर्ती नये पदों मे स्थान पाने की ही बात है तो सीधी सी बात है आरक्षण तो संवैधानिक है फिर ये गतिरोध क्यूं ? ईश्वर करे विरोधी सभी एससी ओबीसी, एसटी सांसदों को सद्बुद्धि मिल जाय कि ये अपने हक और अधिकार को समझ सके और देश बहुसन्ख्यकों की गले मे तलवार ना चलाये ।
By जितेन्द्र पाटले (12th-December-2012 10:44:PM)
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