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आडवाणी के बयान पर हंगामा, वापस लिया बयान
नई दिल्ली, लाइव हिन्दुस्तान
First Published:08-08-12 01:06 PM
Last Updated:08-08-12 04:59 PM
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लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने बुधवार को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के दूसरे कार्यकाल की सरकार को 'नाजायज' कह दिया, जिसके बाद सत्ता पक्ष की ओर से सदन में जबरदस्त हंगामा हुआ। हंगामे को देखते हुए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

बाद भारी हंगामे के बाद आडवाणी ने सफाई दी और अपने शब्द वापस लिए।

आडवाणी के बयान पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी आपा खो दिया। सत्ता पक्ष की ओर से बयान वापस लेने की मांग उठने लगी। लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने सदन में शांति की अपील की, लेकिन उन्हें अनसुना कर दिया गया।

सत्ता पक्ष के सदस्य आडवाणी से बयान वापस लेने की मांग कर रहे थे। हंगामे को देखते हुए मीरा कुमार ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

असम हिंसा पर अपनी बात रखते हुए आडवाणी ने कहा था कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग की पहली सरकार वैध थी, जबकि दूसरी नहीं है। बाद में आडवाणी ने स्पष्ट किया कि उनका आशय जुलाई, 2008 के विश्वास मत को लेकर था, न कि 2009 के चुनाव से।

चिदंबरम सहित महंगाई, आर्थिक संकट और सूखा पर सरकार को घेरने में विपक्ष कोई कोर-कसर नहीं रखेगा। रविवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से उनके आवास पर मिलने के बाद नए वित्त मंत्री ने मंगलवार को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली से मुलाकात की।

समझा जाता है कि जेटली के संसद भवन स्थित कार्यालय में हुई मुलाकात के दौरान चिदंबरम ने खुद को लेकर भाजपा नेताओं का मन टटोलने की कोशिश की। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान भाजपा समेत पूरे विपक्ष ने दोनों सदनों में चिदंबरम का बहिष्कार किया था।

सत्र के शुरुआती दिन से ही विपक्ष असम में हुई हिंसा के लिए संप्रग सरकार की खिंचाई करने के लिए पूरी तरह से तैयार बैठा था। दोबारा वित्ता मंत्रालय संभालने के बाद यह पहला मौका होगा ,जब वित्ता मंत्री पी चिदंबरम विपक्ष का सामना करेंगे।

एयरसेल-मैक्सिस सौदे को लेकर विपक्ष के निशाने पर रहे हैं। ऐसे में चिदंबरम की राह पहले से कहीं ज्यादा कठिन हो सकती है।

वैसे भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सरकार को असम हिंसा के साथ-साथ चिदंबरम को महंगाई, आर्थिक संकट और सूखा पर घेरने में कोई कोरकसर नहीं छोड़ेगी। सत्र के पहले ही दिन भाजपा असम में जारी हिंसा का मामला उठाएगी।

गौरतलब है कि संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान भाजपा समेत पूरे विपक्ष ने दोनों सदनों में चिदंबरम का बहिष्कार किया था।

भाजपा ने 2जी घोटाले में चिदंबरम के संलिप्त होने का आरोप लगाया था। विपक्ष का आरोप था कि स्पेक्ट्रम आवंटन की अवधि के दौरान चिदंबरम वित्ता मंत्री थे।

पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के बयान का हवाला देते हुए उन पर जोरदार हमले किए गए। इतना ही नहीं विपक्ष ने एयरसेल-मैक्सिस सौदे से चिदंबरम के बेटे के लाभान्वित का आरोप भी मढ़ा।

चिदंबरम की मुख्य चिंता यह है कि इस बार सरकार में प्रणब मुखर्जी जैसा कोई ऐसा संकटमोचक नहीं है, जो उनके बचाव में उतरेगा।

संसद के बुधवार से शुरू हुए मानसून सत्र में विपक्षी दल असम में हाल में हुई धार्मिक हिंसा, बढ़ती मंहगाई, देश की अर्थव्यवस्था और सूखे की बन रही स्थिति पर सरकार को घेरने की कोशिश करेंगे। 

 
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टिप्पणियाँ
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टिप्पणियॉ पढ़े(1)
सच्ची बातें कड़वी लगाती है जो सोनिया जी को चुभ गयी तो स्वाभाविक है की सरे कांग्रेसियों को भी चुभी होगी यह कोई नै बात ततो थी नहीं हाँ इस रूप me कहना नै थी जो अन्द्वानिजी को बहुत पहले कहनी चाहिए
By rajesh singh (8th-August-2012 04:32:PM)
 
 
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