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शिक्षा का अधिकार विधेयक को संसद की मंजूरी
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:09-05-12 07:12 PM
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छह से 14 वर्ष तक के बच्चों को नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा के अधिकार कानून में संशोधन के लिए पेश विधेयक को संसद ने बुधवार को मंजूरी दे दी। इसमें मदरसा, वैदिक पाठशाला जैसी अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थाओं को आरटीई के दायरे से बाहर करने और सभी तरह की अशक्तता वाले बच्चों को शिक्षा के अधिकार का प्रावधान किया गया है।

यह विधेयक कुछ दिन पहले राज्यसभा में पारित हो चुका है और आज लोकसभा ने इस पर मुहर लगाई। नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार संशोधन विधेयक 2012 पर चर्चा का जवाब देते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि शिक्षा के अधिकार कानून में संशोधन कर सभी तरह के अशक्त बच्चों को कक्षा में सामान्य बच्चों की तरह शिक्षा प्राप्त करने के अधिकार का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि इसके तहत आटिज्म, सेरेब्रल पाल्सी, मानसिक अशक्तता और अन्य तरह की अशक्तता वाले बच्चों को कक्षा में अन्य बच्चों की तरह शिक्षा का अवसर प्रदान करने की व्यवस्था है। इसके लिए कानून में अशक्तता की परिभाषा को व्यापक बनाया गया है।  हमारा मानना है कि छह से 14 वर्ष के प्रत्येक बच्चों को नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है।

सिब्बल ने कहा कि यह भी प्रावधान किया गया है कि ऐसे अशक्त बच्चों को अपने घर में भी शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार हो। लेकिन स्कूल इस प्रावधान को आधार बनाकर इसका दुरूपयोग बच्चों को स्कूल से बाहर करने के लिए नहीं करें।

 
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