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मानसून सत्र में सरकार पर होगी विपक्ष के सवालों की बारिश
नई दिल्ली, लाइव हिन्दुस्तान
First Published:08-08-12 10:15 AM
Last Updated:08-08-12 11:25 AM
संसद का मानसून सत्र बुधवार से शुरू हो रहा है। भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह असम हिंसा का मामला मानूसन सत्र के पहले ही दिन दोनों सदनों में जोरशोर से उठाएगी।
चिदंबरम सहित महंगाई, आर्थिक संकट और सूखा पर सरकार को घेरने में विपक्ष कोई कोर-कसर नहीं उठा रखेगा। बीजेपी अहम हिंसा पर स्थगन प्रस्ताव रखेगी।
रविवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से उनके आवास पर मिलने के बाद नए वित्त मंत्री ने मंगलवार को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली से मुलाकात की।
समझा जाता है कि जेटली के संसद भवन स्थित कार्यालय में हुई मुलाकात के दौरान चिदंबरम ने खुद को लेकर भाजपा नेताओं का मन टटोलने की कोशिश की।
मानसून सत्र शुरू होने से पहले उनके लोकसभा में नेता विरोधी दल सुषमा स्वराज से मिलने की संभावना भी जताई जा रही है। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान भाजपा समेत पूरे विपक्ष ने दोनों सदनों में चिदंबरम का बहिष्कार किया था।
लोकसभा में आडवाणी कार्यस्थगन प्रस्ताव पेश कर इस विषय पर चर्चा की मांग करेंगे। राज्यसभा में भाजपा दल के उपनेता रविशंकर प्रसाद व बलबीर पुंज प्रश्न प्रहर स्थगित कर असम पर चर्चा की मांग करेंगे। अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो हंगामा मचना तय है।
सत्र के शुरुआती दिन से ही विपक्ष असम में हुई हिंसा के लिए संप्रग सरकार की खिंचाई करने के लिए पूरी तरह से तैयार बैठा है। दोबारा वित्ता मंत्रालय संभालने के बाद यह पहला मौका होगा ,जब वित्ता मंत्री पी चिदंबरम विपक्ष का सामना करेंगे।
एयरसेल-मैक्सिस सौदे को लेकर विपक्ष के निशाने पर रहे हैं। ऐसे में चिदंबरम की राह पहले से कहीं ज्यादा कठिन हो सकती है।
मानसून सत्र के लिए जहां विपक्ष तैयार है, वहीं संप्रग सरकार भी इसके लिए तैयार हो रही है। उम्मीद यह भी है कि वित्तमंत्री पी चिदंबरम लोकसभा में नेता विपक्ष सुषमा स्वराज से भी मुलाकात करेंगे।
वैसे भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सरकार को असम हिंसा के साथ-साथ चिदंबरम को महंगाई, आर्थिक संकट और सूखा पर घेरने में कोई कोरकसर नहीं छोड़ेगी। सत्र के पहले ही दिन भाजपा असम में जारी हिंसा का मामला उठाएगी।
गौरतलब है कि संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान भाजपा समेत पूरे विपक्ष ने दोनों सदनों में चिदंबरम का बहिष्कार किया था।
भाजपा ने 2जी घोटाले में चिदंबरम के संलिप्त होने का आरोप लगाया था। विपक्ष का आरोप था कि स्पेक्ट्रम आवंटन की अवधि के दौरान चिदंबरम वित्ता मंत्री थे।
पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के बयान का हवाला देते हुए उन पर जोरदार हमले किए गए। इतना ही नहीं विपक्ष ने एयरसेल-मैक्सिस सौदे से चिदंबरम के बेटे के लाभान्वित का आरोप भी मढ़ा।
चिदंबरम की मुख्य चिंता यह है कि इस बार सरकार में प्रणब मुखर्जी जैसा कोई ऐसा संकटमोचक नहीं है, जो उनके बचाव में उतरेगा।
संसद के बुधवार से शुरू हो रहे मानसून सत्र में विपक्षी दल असम में हाल में हुई धार्मिक हिंसा, बढ़ती मंहगाई, देश की अर्थव्यवस्था और सूखे की बन रही स्थिति पर सरकार को घेरने की कोशिश करेंगे।
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