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NCTC का होगा राजनीतिक दुरुपयोग: शिवराज
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:05-05-12 01:57 PM
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को कहा कि राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी केन्द्र (एनसीटीसी) के प्रस्तावित स्वरुप में उसका राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरूपयोग हो सकता है। उन्होंने केन्द्र पर पुलिस के अधिकारों को केन्द्रीकृत करने का आरोप भी लगाया।
चौहान ने कहा कि एनसीटीसी अपने मौजूदा स्वरुप में संविधान प्रदत्त संघीय ढांचे के खिलाफ जाता है। साथ ही कहा कि आतंकवाद से लडाई में सभी संबद्ध पक्षों के साथ टीम के सदस्य की तरह व्यवहार किया जाना चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्रियों की बैठक में कहा कि कई सुरक्षा विश्लेषकों ने राय दी है कि खुफिया ब्यूरो के तहत काम करने वाले एनसीटीसी का राजनीतिक दुरुपयोग हो सकता है। यह चिन्ता सही लगती है क्योंकि प्रस्तावित स्वरुप में एनसीटीसी का दुरुपयोग किया जा सकता है।
चौहान ने कहा कि मैं नहीं मानता कि एनसीटीसी के गठन के प्रावधान संघीय ढांचे के अनुरुप हैं, जो हमें संविधान ने प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि एक ओर भारत सरकार केन्द्र और राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की बात करती है जबकि दूसरी ओर आतंकवाद से निपटने की नीतियों पर फैसला करने में राज्य अधिकारियों की अनदेखी की जाती है।
चौहान ने कहा कि 2008 में गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून में संशोधन या राष्ट्रीय जांच एजेंसी के गठन के वक्त राज्य की एजेंसियों से कोई सलाह मशविरा नहीं किया गया।
चौहान ने कहा कि किसी भी सूरत में एनसीटीसी को राज्य एजेंसियों को विश्वास में लिये बगैर कोई कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एनसीटीसी के गठन का आदेश बताता है कि राज्य एजेंसी एनसीटीसी को खुफिया जानकारी देगी और एनसीटीसी उसका विश्लेषण करने के बाद तय करेगा कि खुद कार्रवाई करे या फिर किसी अन्य एजेंसी को ऐसा करने के लिए कहे।
चौहान ने कहा कि यह प्रावधान केन्द्र और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय की अवधारणा से मेल नहीं खाता।
चौहान ने कहा कि एनसीटीसी अपने मौजूदा स्वरुप में संविधान प्रदत्त संघीय ढांचे के खिलाफ जाता है। साथ ही कहा कि आतंकवाद से लडाई में सभी संबद्ध पक्षों के साथ टीम के सदस्य की तरह व्यवहार किया जाना चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्रियों की बैठक में कहा कि कई सुरक्षा विश्लेषकों ने राय दी है कि खुफिया ब्यूरो के तहत काम करने वाले एनसीटीसी का राजनीतिक दुरुपयोग हो सकता है। यह चिन्ता सही लगती है क्योंकि प्रस्तावित स्वरुप में एनसीटीसी का दुरुपयोग किया जा सकता है।
चौहान ने कहा कि मैं नहीं मानता कि एनसीटीसी के गठन के प्रावधान संघीय ढांचे के अनुरुप हैं, जो हमें संविधान ने प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि एक ओर भारत सरकार केन्द्र और राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की बात करती है जबकि दूसरी ओर आतंकवाद से निपटने की नीतियों पर फैसला करने में राज्य अधिकारियों की अनदेखी की जाती है।
चौहान ने कहा कि 2008 में गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून में संशोधन या राष्ट्रीय जांच एजेंसी के गठन के वक्त राज्य की एजेंसियों से कोई सलाह मशविरा नहीं किया गया।
चौहान ने कहा कि किसी भी सूरत में एनसीटीसी को राज्य एजेंसियों को विश्वास में लिये बगैर कोई कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एनसीटीसी के गठन का आदेश बताता है कि राज्य एजेंसी एनसीटीसी को खुफिया जानकारी देगी और एनसीटीसी उसका विश्लेषण करने के बाद तय करेगा कि खुद कार्रवाई करे या फिर किसी अन्य एजेंसी को ऐसा करने के लिए कहे।
चौहान ने कहा कि यह प्रावधान केन्द्र और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय की अवधारणा से मेल नहीं खाता।
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