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शिवराज के आभामंडल में घिरी पार्टी और सरकार
भोपाल, एजेंसी
First Published:28-11-12 09:51 AM
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मध्य प्रदेश में वर्तमान दौर में सत्ता और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की राजनीति पूरी तरह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के इर्द-गिर्द घूमती नजर आती है।

आलम यह है कि उनका आभामंडल इतना बढ़ चुका है कि उसकी छाया से बाहर निकलकर सत्ता और संगठन में अपना वजूद बना पाना किसी के लिए भी आसान नहीं रहा। यही कारण है कि सारी सफलताओं का श्रेय उनकी झोली में जाता रहा है।

चौहान ने सात वर्ष पूर्व 29 नवंबर 2005 को राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर कमान संभाली थी। तब हर तरफ से सवाल उठ रहे थे, क्योंकि चौहान ने इससे पहले सत्ता में बड़ी जिम्मेदारी जो कभी नहीं निभाई थी।

राजनीतिक प्रेक्षकों से लेकर उनके दल के नेता तक सशंकित थे कि चौहान के नेतृत्व में सरकार ज्यादा दिन चल भी पाएगी या नया नेता तलाशने की जरुरत होगी। क्योंकि उन्हें अपने ही दल के धुरंधरों से लोहा जो लेना था। 

वक्त गुजरने के साथ चौहान ने अपने राजनीतिक कौशल का न केवल परिचय दिया, बल्कि एक दक्ष नेता व प्रशासक के तौर पर सरकार व पार्टी के भीतर के धुरंधरों को कतार में लाकर खड़ा कर दिया। इतना ही नहीं राज्य में लगातार दूसरी बार गैर कांग्रेसी सरकार बनाने का कीर्तिमान भी बनाया, वहीं उपचुनावों व नगरीय निकाय के चुनावों में भी सफलताएं पार्टी को मिली।

वरिष्ठ पत्रकार गिरिजाशंकर मानते हैं कि चौहान को मुख्यमंत्री बनने से पहले राजनीतिक अनुभव था, हाईकमान भी उन पर भरोसा करता था और वक्त के साथ उन्होंने प्रशासनिक अनुभव हासिल किया। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने सरकार चलाई। इतना ही नहीं उन्होंने अपने को राजनीतिक व सरकार के विवाद से दूर भी रखा।

गिरिजाशंकर आगे कहते हैं कि राजनीतिक स्थिरता के चलते जनता का चौहान पर भरोसा बढ़ा और स्वीकार्यता बढ़ी। इसी स्वीकार्यता ने प्रशासन तंत्र को मजबूर कर दिया कि वह उनका साथ दे। चौहान की सफलता में उनकी काबिलियत और पार्टी की कमजोरी शामिल है।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता विजेश लूनावत शिवराज को हर वर्ग का हमदर्द व साथी मानते हैं। उनका कहना है कि बेटी से लेकर बुजुगरे तक के लिए चौहान ने अपने कार्यकाल में अनेक ऐतिहासिक फैसले लिए है, इन फैसलों के चलते वे सभी के नायक बन गए है। उनके शासनकाल के बीते सात साल आम आदमी के साथ के साल रहे है।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने शिवराज के सात साल और भाजपा के शासनकाल के नौ वर्षों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि राज्य को मंदिर और जनता को भगवान बताने वाले मुख्यमंत्री चौहान ही जाने कि वे किस तरह की आराधना कर रहे थे कि राज्य में अपराध बढ़े, घपले और घोटाले कण-कण में हो गए और किसान बदहाली में पहुंच गए। बीते सात सालों में सरकार स्वर्णिम मध्यप्रदेश व आओ बनाए मध्य प्रदेश जैसे नारे देने व उत्सवों में डूबी रही और ठगी गई जनता उसे एक टक देख रही है।

चौहान के खाते उपलब्धियां हैं तो खामियां भी कम नहीं हैं। एक तरफ योजनाएं उनका राजनीतिक ग्राफ बढ़ाती हैं तो जमीन-खदान आवंटन व मंत्रियों से लेकर अफसरों तक पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप उन्हें कटघरे में खड़ा भी करते हैं। इन स्थितियों में उनके लिए 2013 के विधानसभा चुनाव किसी चुनौती से कम नहीं होने वाले हैं क्योंकि अपना जादू बनाए रखना उनके लिए आसान भी नहीं होगा।

 
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