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सवालों का सीधा और सटीक जवाब दें मंत्री: मीरा
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:04-05-12 07:46 PM
लोकसभा में शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान वित्त मंत्रालय से जुड़े प्रश्न पर वित्त राज्यमंत्री नमो नारायण मीणा के उत्तर से विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ओर के सदस्य असंतुष्ट नजर आए, जिस पर अध्यक्ष मीरा कुमार ने मंत्री से सवालों का सीधा और सटीक जवाब देने को कहा।
सदन में वित्त मंत्रालय पर ग्रामीण ऋण नीति और विनियामकों की नियुक्ति पर प्रश्न के दौरान भाजपा की रमादेवी, कांग्रेस के संजय निरुपम, भाजपा के निशिकांत दुबे, कांग्रेस की ज्योति मिर्धा, सपा के शैलेन्द्र कुमार आदि ने प्रश्न पूछा।
रमा देवी ने किसानों के ऋण भुगतान में विफल रहने के कारण आत्महत्या के मामलों विशेष तौर पर बिहार के आंकड़ों के बारे में जानकारी मांगी और इस संबंध में सरकार की नीति के बारे में बताने का आग्रह किया।
मंत्री ने कहा कि सरकार कृषि क्षेत्र के लिए ऋण उपलब्ध कराने के लिए वार्षिक लक्ष्य निर्धारित करती है। 2012-13 के लिए 5,75,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जबकि 2011-12 में यह लक्ष्य 4,75,000 करोड़ रुपये था। भारतीय रिजर्व बैंक ने एक लाख रुपये तक कृषि ऋण के लिए बैंकों से गारंटी नहीं लेने को कहा है।
मीणा जब सवालों के जवाब में आंकड़ों का हवाला देते रहे तो सदस्यों ने असंतोष जताना शुरू कर दिया कि उनके सवालों का सीधा उत्तर नहीं मिल रहा है।
रमा देवी ने जवाब पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मंत्री जी हमें पूरी दुनिया घुमा लाए लेकिन बिहार के बारे में नहीं बताया। चावला समिति की सिफारिशों के आलोक में नियमाकों का स्वतंत्र कैडर गठित किये पर जानकारी मांगने वाले कांग्रेस के संजय निरूपम ने कहा कि उन्होंने जो सवाल किया था उसका जवाब तो मिला ही नहीं।
मंत्री के उत्तर से असंतुष्ट यशवंत सिन्हा ने कहा कि पूछा कुछ गया है और मंत्री जवाब कुछ और दे रहे हैं।
सदन में वित्त मंत्रालय पर ग्रामीण ऋण नीति और विनियामकों की नियुक्ति पर प्रश्न के दौरान भाजपा की रमादेवी, कांग्रेस के संजय निरुपम, भाजपा के निशिकांत दुबे, कांग्रेस की ज्योति मिर्धा, सपा के शैलेन्द्र कुमार आदि ने प्रश्न पूछा।
रमा देवी ने किसानों के ऋण भुगतान में विफल रहने के कारण आत्महत्या के मामलों विशेष तौर पर बिहार के आंकड़ों के बारे में जानकारी मांगी और इस संबंध में सरकार की नीति के बारे में बताने का आग्रह किया।
मंत्री ने कहा कि सरकार कृषि क्षेत्र के लिए ऋण उपलब्ध कराने के लिए वार्षिक लक्ष्य निर्धारित करती है। 2012-13 के लिए 5,75,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जबकि 2011-12 में यह लक्ष्य 4,75,000 करोड़ रुपये था। भारतीय रिजर्व बैंक ने एक लाख रुपये तक कृषि ऋण के लिए बैंकों से गारंटी नहीं लेने को कहा है।
मीणा जब सवालों के जवाब में आंकड़ों का हवाला देते रहे तो सदस्यों ने असंतोष जताना शुरू कर दिया कि उनके सवालों का सीधा उत्तर नहीं मिल रहा है।
रमा देवी ने जवाब पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मंत्री जी हमें पूरी दुनिया घुमा लाए लेकिन बिहार के बारे में नहीं बताया। चावला समिति की सिफारिशों के आलोक में नियमाकों का स्वतंत्र कैडर गठित किये पर जानकारी मांगने वाले कांग्रेस के संजय निरूपम ने कहा कि उन्होंने जो सवाल किया था उसका जवाब तो मिला ही नहीं।
मंत्री के उत्तर से असंतुष्ट यशवंत सिन्हा ने कहा कि पूछा कुछ गया है और मंत्री जवाब कुछ और दे रहे हैं।
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