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रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) लाने के खिलाफ लोकसभा में पेश विपक्ष का प्रस्ताव गिर गया।
खुदरा एफडीआई के खिलाफ प्रस्ताव लोकसभा में गिरा
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:05-12-12 07:43 PM
Last Updated:06-12-12 09:36 AM
मल्टी ब्रांड खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) लाने के खिलाफ लोकसभा में पेश विपक्ष का प्रस्ताव आज गिर गया। प्रस्ताव पर मत विभाजन से पहले ही सरकार को राहत देते हुए सपा और बसपा सदस्य सदन से वाकआउट कर गए।
विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज की ओर से रखे गए इस प्रस्ताव कि ये सभा सरकार से सिफारिश करती है कि वह मल्टी ब्रांड खुदरा व्यापार में 51 प्रतिशत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति देने संबंधी अपने निर्णय को तत्काल वापस ले, के पक्ष में 218 जबकि विरोध में 253 मत पड़े। सदन ने इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय की ओर से रखे गए विदेशी मुद्रा प्रबंध कानून (फेमा) में कुछ संशोधन किए जाने संबंधी प्रस्ताव को भी 254 के मुकाबले 224 मतों से नामंजूर कर दिया।
विपक्ष का प्रस्ताव गिरने पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सदन के बाहर संवाददाताओं से बातचीत में प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि सरकार के इस फैसले को अब सदन की मंजूरी भी मिल गई है। विपक्ष के इस प्रस्ताव को परास्त करने में 22 सदस्यों वाली सपा और 21 सदस्यों वाली बसपा की बड़ी भूमिका रही। दोनों पार्टियों ने हालांकि एफडीआई का विरोध किया लेकिन मत विभाजन से पहले ही सदन से वाकआउट कर गए।
इससे पहले खुदरा एफडीआई पर दो दिन चली चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने विपक्ष के इन आरोपों को गलत बताया कि सरकार की ओर से सदन में दिए गए इस आश्वासन का उल्लंघन किया गया है कि एफडीआई के बारे में अंतिम निर्णय करने से पूर्व सभी राजनीतिक दलों, मुख्यमंत्रियों और अन्य संबद्ध पक्षों से विचार विमर्श किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस बारे में सभी राजनीतिक दलों से बातचीत या पत्र व्यवहार किया गया। देश भर के किसानों के 12 मान्य संगठनों तथा उपभोक्ताओं के 17 संगठनों को इस बारे में पत्र लिखा गया और इन सभी किसानों और उपभोक्ता संगठनों ने खुदरा क्षेत्र में एफडीआई पर सरकार के फैसले का समर्थन किया था। शर्मा ने कहा कि इसके अलावा 21 राज्यों में से 11 कषि प्रधान राज्यों ने सरकार के एफडीआई फैसले का समर्थन किया तथा केवल सात राज्यों ने विरोध किया।
सुषमा ने चर्चा का जवाब देते हुए सरकार से सवाल किया कि जब मुख्य विपक्षी दल भाजपा एफडीआई के सरकार के फैसले से सहमत नहीं हुआ तो वह आम सहमति बनने का दावा कैसे कर सकती है। उन्होंने दलील दी कि सदन में इस दो दिन की चर्चा में भी जिन 18 दलों ने हिस्सा लिया उनमें से सपा और बसपा सहित 14 ने एफडीआई का विरोध किया है और अगर उन 14 दलों के सदस्यों की संख्या जोड़ ली जाए तो उनकी संख्या 282 हो जाती है जो बहुमत से कहीं अधिक है जबकि जिन दलों ने इसका समर्थन किया है उनकी संख्या केवल 224 होती है।
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टिप्पणियाँ
टिप्पणियॉ पढ़े(3)
सपा ,बसपा इस मुद्दे पर भाषण के लिए तो आम आदमी के साथ हैं पर वोटिंग में कांग्रेस की सुविधा के लिए सदन से बाहर चले गए हैं !
By vivek (6th-December-2012 12:28:AM)
ajj india ka sabse bura din hai isse saf ho gaya hai ki s p & b s p ye dono hi desha ki sabse bhrast parti hai ye dono party ne BHRAT BAND ka ailan kiya tha vo b FDI k virodh me tab ajj in dono ne ajj UP ke kisano aur logo ko dhokha diya isi liye mai ajj UP ke logo se appel kroga ki ane vale election me inhe vote na de kar AAM ADAMI PARTY KO VOTE DE aur jitay
By surendra mohan patel (5th-December-2012 09:34:PM)
this can allow in a limited area as four mahanagar and their near about area and then state capetial
By rajkumar (5th-December-2012 08:44:PM)
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