रविवार, 30 अगस्त, 2015 | 00:25 | IST
 |  Site Image Loading Image Loading
ब्रेकिंग
गाजीपुर रोड पर गाड़ियों पर लदे जानवर मिलने से बवाल, लगाया जाम।
राजकोट से पहली बार विधानसभा पहुंचे थे मोदी, केशुभाई
राजकोट, एजेंसी First Published:09-12-2012 09:59:08 AMLast Updated:09-12-2012 10:21:25 AM
Image Loading

सौराष्ट्र में मोदी विरोधी राजनीति का केंद्र बन चुके राजकोट जिले के शहरी इलाकों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)का दबदबा बरकरार है, जबकि ग्रामीण इलाकों में केशुभाई पटेल के विरोधी तेवरों के कारण उसकी पकड़ ढीली हुई है। मौजूदा राजनीति में एक-दूसरे के धुर विरोधी बन चुके मोदी और केशुभाई ने अपना चुनावी सफर यहीं से शुरू किया था।

ग्यारह विधानसभा सीटों वाले सौराष्ट्र के सबसे बड़े इस जिले में भाजपा के पास कभी आठ सीटें हुआ करती थीं, लेकिन बदले परिदृश्य में वह छह सीटों तक सिमटती दिख रही है।

वर्ष 1998 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जिले की आठ सीटें जीती थीं तो 2002 में वह नौ सीटें जीतने में कामयाब रही। हालांकि 2007 के विधानसभा चुनाव में उसकी संख्या सात हो गई।

कांग्रेस के हाथ 1998 में महज तीन सीटें आई थीं, जबकि 2002 में उसे सिर्फ दो सीटों से संतोष करना पड़ा। 2007 में कांग्रेस ने तीन सीटें जीती, जबकि एक सीट उसकी सहयोगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने जीती।

राजकोट से ही मोदी सरकार के वित्त मंत्री और वरिष्ठ नेता वजूभाई वाला चुनाव लड़ते रहे हैं। वाला ने राजकोट-2 सीट से लगातार छह विधानसभा चुनाव जीते हैं और इस बार राजकोट-2 सीट खत्म हो जाने के बाद राजकोट-पश्चिम सीट से वह भाजपा के उम्मीदवार हैं। उनकी जीत सुनिश्चित मानी जा रही है।

विधानसभा चुनाव की दृष्टि से राजकोट, सौराष्ट्र का सबसे बड़ा जिला है। इस जिले में विधानसभा की ग्यारह सीटें मोरबी, टंकारा, वांकानेर, राजकोट पूर्व, राजकोट पश्चिम राजकोट दक्षिण, राजकोट ग्रामीण, जसदण, गोंडल, जेतपुर और धोराजी हैं।

परिसीमन के कारण उपलेटा सीट खत्म हो गई है। राजकोट-1 और राजकोट-2 की जगह राजकोट शहर में तीन सीटें अस्तित्व में आ गई हैं। राजकोट पूर्व, राजकोट पश्चिम और राजकोट दक्षिण।

राजकोट पूर्व पर भाजपा का दबदबा बना हुआ है, जबकि राजकोट दक्षिणी सीट पर बराबरी का मुकाबला है।

केशुभाई का अपना शहर राजकोट ही है और उनकी गुजरात परिवर्तन पार्टी (जीपीपी) पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ रही है। राजकोट जिले में मोदी को घेरने के लिए जीपीपी और कांग्रेस के बीच अंदरूनी तालमेल भी हुआ है। जिस सीट पर जीपीपी का उम्मीदवार मजबूत स्थिति में है उस सीट पर कांग्रेस ने कमजोर उम्मीदवार उतारा है और जिस सीट पर कांग्रेस का उम्मीदवार मजबूत स्थिति में है उस सीट पर जीपीपी ने अपना कमजोर उम्मीदवार खड़ा किया है।

केशुभाई ने 1975 में विधानसभा का पहला चुनाव जीता था तो 1977 में लोकसभा का चुनाव। यह कभी उनका गढ़ हुआ करता था जो बाद में भाजपा के गढ़ में तब्दील हो गया।

गोंडल सीट भी जीपीपी के खाते में जाती दिख रही है। वहां से पूर्व गृह मंत्री गोर्धन झड़ाफिया मैदान में हैं। राजकोट के ग्रामीण इलाकों में पानी बड़ी समस्या है, जिसके कारण लोग भाजपा से नाराज हैं और जातिगत समीकरण भी उनके पक्ष में हैं। यहां पटेलों की आबादी अधिक है और वे केशुभाई का साथ दे रहे हैं। इसका सीधा फायदा जीपीपी और कांग्रेस उम्मीदवारों को मिल रहा है।

जसदण सीट भी जीपीपी को मिल सकती है, जबकि धोरजी और जेतपुर पर कांग्रेसी उम्मीदवार भारी पड़ते दिख रहे हैं। शेष सीटों पर भाजपा बनी हुई है।

मोदी ने 2001 के अक्टूबर महीने में गुजरात के मुख्यमंत्री की कुर्सी सम्भाली तो पहली बार विधानसभा में प्रवेश करने के लिए राजकोट-2 सीट से ही चुनाव लड़ा, जो सीट उनके लिए वजूभाई वाला ने खाली की थी। इसके बाद मोदी ने मणिनगर सीट का रुख किया।

 
 
 
 
जरूर पढ़ें
क्रिकेट
Image Loadingगावस्कर ने पुजारा की तारीफों के पुल बांधे
अपनी अच्छी तकनीक और शांत चित के कारण चेतेश्वर पुजारा क्रीज पर अपने पांव जमाने में माहिर हैं और पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर ने भी इस युवा बल्लेबाज की आज जमकर तारीफ की जिन्होंने अपने नाबाद शतक से भारत को संकट से उबारा।
 
क्रिकेट स्कोरबोर्ड
 
Image Loading

जब संता के घर आए डाकू...
आधी रात को संता के घर डाकू आए।
संता को जगाकर पूछा: यह बताओ कि सोना कहां है?
संता (गुस्से से): इतना बड़ा घर है कहीं भी सो जाओ। इतनी छोटी बात के लिए मुझे क्यों जगाया!