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भूमि आवंटन मामले में अच्युतानंदन के खिलाफ FIR खारिज
कोच्चि, एजेंसी
First Published:06-12-12 02:51 PM
केरल उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ माकपा नेता वीएस अच्युतानदंन के खिलाफ एक भूमि आवंटन मामले में दायर प्राथमिकी को आज खारिज कर दिया और कहा कि उनके खिलाफ झूठे एवं मनगढ़ंत आरोपों में मामला दायर करना हर तरह से अनुचित है।
अदालत ने कहा कि मामले में पेश की गई कुछ चीजें काफी चिंताजनक हैं जिससे इस संदेह को पर्याप्त जगह मिलती है कि राजनीतिक विरोधियों को चुप कराने के लिए सतर्कता मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है।
न्यायमूर्ति एस एस सतीशचंद्रन ने 64 पष्ठ के अपने आदेश में अच्युतानंदन के खिलाफ दायर प्राथमिकी तथा उनके खिलाफ सभी कार्यवाही को खारिज कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री मामले में प्रथम आरोपी थे।
मामला कासरगोड जिले में भूतपूर्व सैनिक एवं अच्युतानंदन के करीबी रिश्तेदार टीके सोमान को 2.33 एकड़ भूमि का आवंटन करते समय नियमों के उल्लंघन से जुड़ा है। मामला उस समय का है जब अच्युतानंदन 2006 से 2011 तक वाम लोकतांत्रिक मोर्चे की सरकार के दौरान मुख्यमंत्री थे।
अच्युतानंदन (88) के अतिरिक्त उनके निजी सहायक सुरेश और पूर्व राजस्व मंत्री केपी राजेंद्रन और दो अधिकारियों को कोझिकोड की अदालत में दायर मामले में आरोपी बनाया गया था। सतर्कता जांच में प्रथम दृष्टया साक्ष्य पाए जाने की बात कही गई थी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने याचिका दायर कर प्राथमिकी खारिज करने की मांग की थी। फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अच्युतानंदन ने तिरुवंनतपुरम में कहा कि यह कांग्रेस नीत यूडीएफ सरकार के लिए नैतिक हार है।
मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने कहा कि सरकार मामले में कानूनी प्रक्रिया के साथ आगे बढ़ेगी और मामले के पीछे कोई राजनीतिक इरादा नहीं था।
अदालत ने कहा कि मामले में पेश की गई कुछ चीजें काफी चिंताजनक हैं जिससे इस संदेह को पर्याप्त जगह मिलती है कि राजनीतिक विरोधियों को चुप कराने के लिए सतर्कता मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है।
न्यायमूर्ति एस एस सतीशचंद्रन ने 64 पष्ठ के अपने आदेश में अच्युतानंदन के खिलाफ दायर प्राथमिकी तथा उनके खिलाफ सभी कार्यवाही को खारिज कर दिया। पूर्व मुख्यमंत्री मामले में प्रथम आरोपी थे।
मामला कासरगोड जिले में भूतपूर्व सैनिक एवं अच्युतानंदन के करीबी रिश्तेदार टीके सोमान को 2.33 एकड़ भूमि का आवंटन करते समय नियमों के उल्लंघन से जुड़ा है। मामला उस समय का है जब अच्युतानंदन 2006 से 2011 तक वाम लोकतांत्रिक मोर्चे की सरकार के दौरान मुख्यमंत्री थे।
अच्युतानंदन (88) के अतिरिक्त उनके निजी सहायक सुरेश और पूर्व राजस्व मंत्री केपी राजेंद्रन और दो अधिकारियों को कोझिकोड की अदालत में दायर मामले में आरोपी बनाया गया था। सतर्कता जांच में प्रथम दृष्टया साक्ष्य पाए जाने की बात कही गई थी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने याचिका दायर कर प्राथमिकी खारिज करने की मांग की थी। फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अच्युतानंदन ने तिरुवंनतपुरम में कहा कि यह कांग्रेस नीत यूडीएफ सरकार के लिए नैतिक हार है।
मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने कहा कि सरकार मामले में कानूनी प्रक्रिया के साथ आगे बढ़ेगी और मामले के पीछे कोई राजनीतिक इरादा नहीं था।
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