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एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता की ओर झारखंड
रांची, एजेंसी First Published:08-01-2013 01:14:18 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM
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झारखंड में भाजपा नीत गठबंधन सरकार के प्रमुख घटक झामुमो के आज मुंडा सरकार से समर्थन वापस लेने और मुख्यमंत्री के इस्तीफा देने के बाद यह राज्य वर्ष 2000 में अपने गठन के बाद से ग्यारहवीं बार सत्ता परिवर्तन के कगार पर खड़ा है।

राजनीतिक अस्थिरता के लिए बदनाम इस नए राज्य में पिछले बारह वषो में आठ सरकारें बन चुकी हैं और दो बार राष्ट्रपति शासन लगा है। झामुमो के आज मुंडा सरकार से समर्थन वापसी का पत्र राज्यपाल सैयद अहमद को सौंपने के बाद यह सरकार अल्पमत में आ गयी है, लेकिन राज्य सरकार ने भी अपना दांव खेलते हुए राज्य विधानसभा भंग करने की सिफारिश करने का फैसला कर डाला।

इसके साथ ही मुंडा ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा भी सौंप दिया है। हालांकि झामुमो का कहना है कि अल्पमत की सरकार ऐसी सिफारिश नहीं कर सकती। अब गेंद राज्यपाल के पाले में है और देखना यह है कि यहां कोई नयी सरकार का गठन होता है अथवा राष्ट्रपति शासन लागू होता है।
    
झारखंड में वर्ष 2000 में राज्य के गठन के बाद से जहां मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने इस बार तीसरी बार मुख्यमंत्री का पद संभाला था, वहीं उनके गुरू और झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख शिबू सोरेन ने भी यहां तीन बार सरकार बनाई, लेकिन वह कभी भी लंबी पारी नहीं खेल सके।
    
उनके अलावा यहां मधु कोड़ा और बाबूलाल मरांडी भी एक एक बार मुख्यमंत्री बन चुके हैं। मधु कोड़ा ने 2006 से 2008 तक कांग्रेस और राजद के समर्थन से सरकार बनायी थी।
    
मरांडी के नेतृत्व में बनी राज्य की पहली सरकार से मार्च, 2003 में समता पार्टी और वनांचल कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिरा दी। इसके बाद मरांडी को हटाकर मुंडा ने नेतृत्व में राज्य में भाजपा की नई सरकार का गठन किया गया, जिससे मरांडी नाराज हो गये और बाद में उन्होंने 2007 में अलग पार्टी झारखंड विकास मोर्चा का गठन किया।
     
वर्ष 2005 में हुए राज्य के पहले विधानसभा के चुनावों में त्रिशंकु विधानसभा का गठन होने के बाद एक बार फिर नौ दिन के लिए शिबू सोरेन के मुख्यमंत्री बनने के बाद अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में नयी सरकार का गठन हुआ, लेकिन वह भी सितंबर 2006 में गिर गयी और फिर कांग्रेस के समर्थन से मधु कोड़ा के नेतृत्व में सरकार गठित हुई।
     
कोडा की सरकार 23 माह ही चल पाई। इसके बाद 27 अगस्त 2008 में शिबू सोरेन ने राज्य में मुख्यमंत्री का पद दूसरी बार संभाला। लेकिन विधानसभा का चुनाव न जीत सकने पर उन्हें 12 जनवरी, 2009 को इस्तीफा देना पड़ा और 19 जनवरी, 2009 को झारखंड में पहली बार राष्ट्रपति शासन लागू हुआ। 
    
वर्ष 2009 के अंत में हुए विधानसभा चुनावों में फिर से राज्य में त्रिशंकु विधानसभा का गठन हुआ। 23 दिसंबर को विधानसभा के गठन की अधिसूचना जारी होने के बाद 30 दिसंबर 2009 में एक बार फिर शिबू सोरेन ने राज्य की सत्ता भाजपा के सहयोग से संभाली, लेकिन अप्रैल 2010 में लोकसभा में केन्द्रीय बजट पर भाजपा के कटौती प्रस्ताव के विरोध में संप्रग सरकार का समर्थन कर शिबू ने नाराजगी मोल ले ली और 24 मई, 2010 में भाजपा ने उनकी सरकार से समर्थन वापस लेकर उसे गिरा दिया।
    
एक बार फिर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ। इसके बाद 11 सितंबर, 2010 को झामुमो के समर्थन से यहां फिर अर्जुन मुंडा के नेतृत्व में वर्तमान सरकार का गठन हुआ।

 
 
 
 
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