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महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर कड़ाई से निपटेंगे: शिंदे
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:04-01-13 03:04 PM
महिलाओं के खिलाफ बलात्कार जैसे अपराधों को अस्वीकार्य बताते हुए सरकार ने शुक्रवार को कहा कि इन अपराधों से कड़ाई से निबटने की आवश्यकता है।
गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि 16 दिसंबर को एक छात्रा से सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद कानून प्रवर्तन एजेंसियों और आपराधिक न्याय प्रणाली की भूमिका पर गंभीर टिप्पणी हुई हैं।
उन्होंने दिल्ली सामूहिक बलात्कार की घटना के बीच आयोजित देश के शीर्ष नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं और हमारे समाज के कमजोर तबकों के खिलाफ इस तरह की घटनाएं हमारे लोकतंत्र में अस्वीकार्य हैं। उनसे कड़ाई से निबटने की जरूरत है।
शिंदे ने कहा कि देश की आजादी के 65 साल बाद भी विभिन्न कानूनों के बावजूद महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों के खिलाफ अपराधों में कमी नहीं आई है।
उन्होंने कहा कि पूरी व्यवस्था, सभी संबंधित पक्षों की भूमिका, हमारे कानूनों की उपयुक्तता और प्रवर्तन की क्रियाशीलता का फिर से मूल्याकंन करने तथा स्कूल के स्तर से जागरूकता तथा संवेदनशीलता बढाने की जरूरत है।
गृह मंत्री ने कहा कि ऐसा लगता है कि कानून समाधान का केवल एक हिस्सा हैं और असल मुश्किल इसे लागू करने के स्तर पर है। शिंदे ने कहा कि अपराध करने वाले सभी अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई ही कानून के प्रति सम्मान लेकर आएगी। हमारा मुख्य लक्ष्य अवरोधों की पहचान करना, कानूनों, इसकी प्रक्रियाओं और जांच के तरीकों के आधुनिकीकरण के लिए सुझाव देना है, ताकि सुनवाई जल्दी पूरी हो और दोषियों को बिना देरी के सजा दी जाए।
उन्होंने कहा कि सभी संस्कृतियों और धर्मों से यह स्पष्ट है कि महिलाओं के लिए अपमान और उनके खिलाफ हिंसा भ्रष्ट मानसिकता को दर्शाता है। मंत्री ने कहा कि यह अस्वीकार्य है कि हमारे समाज में महिलाएं डर और आशंकाओं के बीच रहें। सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह ने कहा कि दिल्ली सामूहिक बलात्कार की शिकार लड़की को सच्ची श्रद्धांजलि यह सुनिश्चित करने पर होगी कि इस तरह की घटनाएं फिर से नहीं हो।
उन्होंने दिल्ली सामूहिक बलात्कार की घटना के बीच आयोजित देश के शीर्ष नौकरशाहों और पुलिस अधिकारियों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं और हमारे समाज के कमजोर तबकों के खिलाफ इस तरह की घटनाएं हमारे लोकतंत्र में अस्वीकार्य हैं। उनसे कड़ाई से निबटने की जरूरत है।
शिंदे ने कहा कि देश की आजादी के 65 साल बाद भी विभिन्न कानूनों के बावजूद महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों के खिलाफ अपराधों में कमी नहीं आई है।
उन्होंने कहा कि पूरी व्यवस्था, सभी संबंधित पक्षों की भूमिका, हमारे कानूनों की उपयुक्तता और प्रवर्तन की क्रियाशीलता का फिर से मूल्याकंन करने तथा स्कूल के स्तर से जागरूकता तथा संवेदनशीलता बढाने की जरूरत है।
गृह मंत्री ने कहा कि ऐसा लगता है कि कानून समाधान का केवल एक हिस्सा हैं और असल मुश्किल इसे लागू करने के स्तर पर है। शिंदे ने कहा कि अपराध करने वाले सभी अपराधियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई ही कानून के प्रति सम्मान लेकर आएगी। हमारा मुख्य लक्ष्य अवरोधों की पहचान करना, कानूनों, इसकी प्रक्रियाओं और जांच के तरीकों के आधुनिकीकरण के लिए सुझाव देना है, ताकि सुनवाई जल्दी पूरी हो और दोषियों को बिना देरी के सजा दी जाए।
उन्होंने कहा कि सभी संस्कृतियों और धर्मों से यह स्पष्ट है कि महिलाओं के लिए अपमान और उनके खिलाफ हिंसा भ्रष्ट मानसिकता को दर्शाता है। मंत्री ने कहा कि यह अस्वीकार्य है कि हमारे समाज में महिलाएं डर और आशंकाओं के बीच रहें। सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
गृह राज्यमंत्री आरपीएन सिंह ने कहा कि दिल्ली सामूहिक बलात्कार की शिकार लड़की को सच्ची श्रद्धांजलि यह सुनिश्चित करने पर होगी कि इस तरह की घटनाएं फिर से नहीं हो।
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