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मायावती के आचरण से राज्यसभा अचम्भित
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:12-12-2012 07:52:54 PMLast Updated:00-00-0000 12:00:00 AM

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी से यह कहकर सदन को चकित कर दिया कि सदन का सुचारू संचालन उनकी जिम्मेदारी है।

मायावती ने प्रश्नकाल के दौरान प्रोन्नति में आरक्षण मुहैया कराने वाले विधेयक को जल्द पास कराने के लिए दबाव बनाने की कोशिश की और अपनी अभद्र भाषा से सदन को चकित कर दिया।

मायावती ने अंसारी की ओर मुखातिब होकर कहा, ''आप 12 बजे चले जाएंगे.. लेकिन सदन की कार्यवाही चलनी चाहिए। यह सुनिश्चित कराना आपकी जिम्मेदारी है। 12 बजते ही आप सदन में नहीं दिखेंगे।''

मायावती ने यह मौखिक हमला सुबह लगभग 11.30 बजे उस समय किया, जब वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा एक प्रश्न का जवाब देकर खाली ही हुए थे।

ज्ञात हो कि अनुसूचित जातियों व अनुसूचित जनजातियों के लिए सरकारी नौकरियों में प्रोन्नति के दौरान आरक्षण मुहैया कराने वाले विधेयक पर चर्चा में हो रही देरी को लेकर बसपा नाराज है।

मायावती के शब्दों से चकित अंसारी ने उनसे कहा कि प्रश्नकाल चलने दें। उन्होंने कहा, ''आप क्या कर रही हैं। यह प्रश्नकाल है।''

मायावती हालांकि अपनी मांग पर अड़ी रहीं। उन्होंने कहा कि पहले यह तय हो जाना चाहिए कि 12 बजे सदन की कार्यवाही कैसे चलेगी। मायवती ने कहा, ''12 बजे व्यवधान पैदा होने वाला है। इस समय सदन चल रहा है। इसलिए पहले यह तय हो जाना चाहिए कि (यह कैसे चलेगा)।'' उन्होंने कहा कि ऐसा कुछ दिनों से चल रहा है।

इसके बाद मायावती अपनी मांग पर दबाव बनाने के लिए बसपा सदस्यों के साथ सभापति के आसन की ओर बढ़ीं। उसके बाद सभापति ने दोपहर तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

कांग्रेस और भाजपा के सदस्य मायावती द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्दों से अचम्भित लगे, लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं की।

ज्ञात हो कि अनुसूचित जातियों व जनजातियों को प्रोन्नति में आरक्षण मुहैया कराने वाले एक संविधान संशोधन विधेयक को लेकर सदन की कार्यवाही बाधित हो रही है। समाजवादी पार्टी इस विधेयक का दृढ़ता के साथ विरोध कर रही है।

बसपा सदस्यों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर राज्यसभा को फिर स्थगित करने के लिए बाध्य किया। बसपा सदस्यों ने लोकसभा की कार्यवाही भी बाधित की।

मायावती ने बाद में अपनी टिप्पणी का बचाव किया और सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस विधेयक को पारित करने के लिए गम्भीर नहीं है।

मायावती ने कहा कि सरकार और भाजपा ने आश्वासन दिया था कि बहुब्रांड खुदरा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर बहस के बाद प्रोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर बहस होगी।

मायावती ने कहा, ''12 बजे के बाद सदन की कार्यवाही नहीं चलने वाली है। यह सरकार की जिम्मेदारी है, यह पीठासीन अधिकारी की जिम्मेदारी है। कोई रास्ता निकाला जाना चाहिए।''

मायावती ने सोमवार को कहा था कि उनकी पार्टी विधेयक पर सरकार का रुख देखने के लिए दो-तीन दिनों तक इंतजार करेगी। उन्होंने कहा, ''पार्टी उसके बाद कड़ा रुख अपनाएगी।''

नियमानुसार, सदस्यों को पीठासीन अधिकारी पर अभद्र टिप्पणी करने की अनुमति नहीं है।

ज्ञात हो कि सभापति प्रश्नकाल की अध्यक्षता करते हैं, जबकि शून्यकाल और उसके बाद की कार्यवाहियों की अध्यक्षता आमतौर पर उपसभापति द्वारा की जाती है। सभापति हालांकि महत्वपूर्ण अवसरों पर सदन में वापस आते हैं। उदाहरण के तौर पर जब प्रधानमंत्री का कोई वक्तव्य हो, या जब किसी सत्र की समाप्ति पर सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो रहा हो।

 
 
 
 
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