मंगलवार, 30 सितम्बर, 2014 | 19:20 | IST
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ओबामा और मोदी ने कहा कि अब भी हमारे संबध की वास्तविक क्षमता को पूरी तरह हकीकत का रूप दिया जाना बाकी है।मोदी और ओबामा ने कहा कि साल 2000 में निस्संदेह, ऐसा बहुत कुछ हुआ जिसके चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कह सके कि हम स्वाभाविक साझीदार हैं।मोदी और ओबामा ने एक संयुक्त संपादकीय में कहा कि हमारे संबंध में पहले से बहुत ज्यादा द्विपक्षीय तालमेल है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि आज हमारी भागीदारी मजबूत, विश्वसनीय और टिकाऊ है और इसमें विस्तार हो रहा है।अगस्त, 2014 में आठ बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर 5.8 प्रतिशत रही जो बीते साल की इसी अवधि में 4.7 प्रतिशत थी।जयललिता की जमानत याचिका पर कर्नाटक उच्च न्यायालय बुधवार को सुनवाई करेगा।मारुति सुजुकी मार्च, 2010 और अगस्त, 2013 के बीच विनिर्मित डिजायर, स्विफ्ट और रिट्ज की 69,555 कारें वापस मंगाएगी।दिल्ली की अदालत ने आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम और छोटा शकील को भगोड़ा अपराधी घोषित किया।
 
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गुजरात का 'कुरुक्षेत्र' है गोंडल
गोंडल, एजेंसी
First Published:08-12-12 09:45 AM
Last Updated:08-12-12 09:47 AM
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राजकोट से लगभग 40 किलोमीटर दूर गोंडल विधानसभा क्षेत्र को गुजरात का 'कुरुक्षेत्र' कहा जाता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि बगैर खून-खराबे के यहां का कोई चुनाव सम्पन्न ही नहीं होता।

यहां के राजनीतिक तांडव में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 'कमल' और गुजरात परिवर्तन पार्टी (जीपीपी) के 'बल्ले' के बीच है। भाजपा ने यहां दो बार विधायक रहे जयसिंह जडेजा पर बाजी लगाई है, जिन्हें अपने धन व बाहुबल के साथ मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्मे पर भरोसा है तो दूसरी ओर जीपीपी के महासचिव व राज्य के पूर्व गृह मंत्री गोर्धन झड़ाफिया हैं जो जातिगत समीकरणों पर नजर टिकाए हुए हैं।

मैदान में हालांकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के चंदू वगासिया और कुछ स्वतंत्र उम्मीदवार भी हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा और जीपीपी के बीच ही माना जा रहा है। दिलचस्प यह है कि 2007 के विधानसभा चुनाव में यह सीट वगासिया ने जीती थी। उन पर भूमि सुधार व सिंचाई योजनाओं में 43 लाख रुपये का भ्रष्टाचार के आरोप हैं। वगासिया ने पिछले चुनाव में जडेजा को 600 मतों के अंतर से हराया था।

गोंडल का राजनीतिक इतिहास हिंसक रहा है और यहां धन व बाहुबल हावी रहा है। राकांपा के महिपत सिंह जडेजा की कभी इस इलाके में तूती बोलती थी। कांग्रेस के तत्कालीन विधायक पोपट भाई सोराठिया की 1988 में हुई हत्या के बाद तो उनका खौफ इस कदर बढ़ा कि वह 1990 और 1995 में अपने धन व बाहुबल से चुनाव जीतने में भी सफल रहे। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण महिपत के बेटे अनिरुद्ध सिंह ने कथित तौर पर सोराठिया की हत्या की थी।

'लोहा, लोहे को काटता है' के सिद्धांत पर भाजपा ने जयसिंह जडेजा को उनके मुकाबले खड़ा किया, जिनके ऊपर खुद हत्या तक के मामले दर्ज हैं।

जयसिंह जडेजा ने महिपत सिंह को 1998 और 2002 के चुनाव में पराजित कर उनके दबदबे को कुछ कम किया। लेकिन क्षेत्र की जनता पर उनका प्रभाव बना रहा। 2007 के चुनाव में जयसिंह को वगासिया के हाथों हार का सामना करना पड़ा। आपसी प्रतिद्वंदिता के चलते महिपत सिंह ने पिछले चुनाव में वगासिया का साथ दिया था।

1.92 करोड़ मतदाताओं की आबादी वाले इस विधानसभा सीट की राजनीति पटेलों के इर्दगिर्द घूमती रही है, जिनकी संख्या तकरीबन 70,000 के करीब है।

गोंडल के श्रीनाथगढ़ में पान की दुकान चलाने वाले भाऊभाई झडाफिया को आयातित उम्मीदवार बताते हैं। वह कहते हैं, ''जयसिंह जडेजा हमारे क्षेत्र के हैं। वह सिर्फ चुनावी मौसम में क्षेत्र में दिखने वालों में नहीं हैं।'' वह जडेजा की छवि को रॉबिनहुड वाली बताते हैं।

वहीं श्रीनाथगढ़ के ही दिलीप पटेल कहते हैं, ''देखिएगा तो पाइएगा क्षेत्र की सारी नदियां सूख गई हैं। नहरों में पानी नहीं है। जिसके चलते किसान नाराज हैं। मोदी ने किसानों के लिए कुछ नहीं किया।''

वह कहते हैं, ''वैसे भी गोंडल का इतिहास खून-खराबों का रहा है। यह चुनावी रणक्षेत्र हर बार कुरुक्षेत्र में तब्दील हो जाता है। हम यह सब नहीं चाहते। इसलिए हम इस परम्परा को बदलना चाहते हैं।''

 
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