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राधे मां के खिलाफ केस दर्ज।
पुलिस ने दिखाई एकजुटता, सुभाष चंद तोमर को एक दिन का वेतन देंगे पुलिसकर्मी
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:25-12-2012 01:49:30 PMLast Updated:25-12-2012 02:58:58 PM

सामूहिक बलात्कार के खिलाफ रविवार को हुए प्रदर्शन में हुई हिंसा के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिस के हवलदार की मंगलवार सुबह मौत हो गई। हवलदार सुभाष चंद तोमर (47) ने आज सुबह राम मनोहर लोहिया अस्पताल में दम तोड़ दिया।
   
अस्पताल में भर्ती होने के बाद से वे वेंटिलेटर पर थे। तोमर उत्तर प्रदेश के मेरठ के रहने वाले थे।
   
तोमर की नियुक्ति करावल नगर इलाके में थी। रविवार को प्रदर्शन के दौरान उन्हें कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंडिया गेट बुलाया गया था। वह तिलक मार्ग पर घायल अवस्था में मिले थे। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया।

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि रात के समय कांस्टेबल सुभाष तोमर की हालत बिगड़ने लगी थी और सुबह 6.30 बजे उनका निधन हो गया।

प्रदर्शनों के दौरान जब तोमर तिलक मार्ग पर गिर गए थे तो प्रदर्शनकारियों ने उनके साथ मारपीट की व उन्हें पैरों से कुचल दिया था। राम मनोहर लोहिया अस्पताल के चिकित्सकों के मुताबिक तोमर की हालत गम्भीर थी और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।

संयुक्त पुलिस आयुक्त ताज हसन ने बताया कि रविवार रात तोमर पर हमले के मामले में आम आदमी पार्टी के एक कार्यकर्ता सहित आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन अगले दिन उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। उन्होंने बताया कि तोमर की मौत के मामले को धारा 302 (हत्या) के तहत दर्ज किया जाएगा।

सम्मान के तौर पर दिल्ली पुलिस के सभी कर्मचारी और अधिकारी एक दिन का वेतन तोमर के परिवार को दान देंगे। तोमर के जख्मी होने के मामले में पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया है जिन पर हत्या के प्रयास का आरोप है। इन लोगों में आम आदमी पार्टी का एक कार्यकर्ता भी शामिल है।
    
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार हुये लोगों पर हत्या का मामला भी चलाया जायेगा। रविवार को इंडिया गेट पर प्रदर्शन में हुई हिंसा में घायल होने के बाद आज दम तोड़ चुके हवलदार तोमर की मौत के लिये प्रदर्शनकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुये उनके पुत्र दीपक ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने उनके पिता को बर्बरता से पीटा।
     
उन्होंने कहा कि जनता ही उनकी मौत के लिये जिम्मेदार है क्योंकि उनको बुरी तरह पीटा गया। क्या वह मेरे पिता को वापस ला सकते हैं। तोमर के भाई युद्धवीर सिंह ने भी कहा कि उनका दोष क्या था वह सिर्फ अपना काम कर रहे थे और अब वह दुनिया में नहीं रहे।
     
हवलदार के भाई देवेंदर सिंह ने कहा कि उनके परिवार की आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है। वह अपनी नौकरी के लिये प्रतिबद्ध थे।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी में 16 दिसम्बर को चलती बस में एक 23 वर्षीया युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद जनता के विरोध-प्रदर्शनों का दौर जारी है।

 
 
 
 
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