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गैंगरेप मामले में दिल्ली पुलिस ने दाखिल किया आरोप-पत्र
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:03-01-13 06:14 PMLast Updated:03-01-13 10:43 PM
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राजधानी में 18 दिन पहले 23 वर्षीय युवती से सामूहिक बलात्कार के मामले में दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया। इस मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों के खिलाफ हत्या, बलात्कार, अपहरण और अन्य आरोप लगाये गये हैं।

पैरामेडिकल की छात्रा की 29 दिसंबर को सिंगापुर के एक अस्पताल में मौत हो गयी थी। इस युवती से 16 दिसंबर को चलती बस सामूहिक बलात्कार किया गया था और उसकी बर्बरता से पिटाई की गयी थी।

आरोप पत्र में इस मामले के आरोपी राम सिंह, उसका भाई मुकेश और साथी पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत हत्या, बलात्कार, हत्या का प्रयास, अपहरण, अप्राकृतिक अपराध, डकैती, लूट के लिये मारपीट, साक्ष्य नष्ट करने, आपराधिक साजिश जैसे आरोप लगाये गये हैं।

इस मामले में छठवां आरोपी नाबालिग है और उसके खिलाफ नाबालिग न्याय बोर्ड द्वारा ही कार्यवाही को अंजाम दिया जायेगा। दिल्ली पुलिस ने 33 पष्ठों के इस आरोप पत्र में नाबालिग आरोपी की भूमिका का भी जिक्र किया है।

पुलिस ने कई दस्तावेजों के साथ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सूर्य मलिक ग्रोवर की अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। ग्रोवर इस आरोप पत्र पर पांच जनवरी को विचार करेंगे। दिल्ली पुलिस ने पीड़ित युवती की पहचान गुप्त रखने के इरादे से प्राथमिकी के विवरण का खुलासा नहीं करने और इसे तथा इसके अन्य दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में रखने के बारे में अदालत से निर्देश मांगा है।

पुलिस ने अदालत से यह गुहार भी की कि इस मामले में अदालत के बंद कमरे में कार्यवाही की जाये। पुलिस ने आज शाम साढ़े पांच बजे आरोप पत्र दाखिल किया गया जो कि अदालत की कार्यवाही के लिये निर्धारित समय से आधे घंटे देरी से हुआ। इस पर जज ने लोक अभियोजक से देर से आरोपपत्र दाखिल करने का कारण पूछा।

लोक अभियोजक राजीव मोहन ने बताया कि जांचकर्ताओं को अधिक संख्या में दस्तावेज और आरोपपत्र को क्रम में लगाने में देरी हो गयी। उन्होंने बताया कि नाबालिग आरोपी के खिलाफ जल्द ही आरोप पत्र दाखिल होगा। पीड़िता के दोस्त के एक रिश्तेदार जो कि एक वकील हैं, ने संवाददाताओं को बताया कि अगर दिल्ली पुलिस उचित तरीके से मामले को नहीं उठायेगी तो वह दिल्ली उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर करेंगे।

अदालत कक्ष में मौजूद साकेत कोर्ट के कुछ वकीलों ने चिल्लाकर मांग की कि आरोपियों को जनता के हाथों में सौंप दिया जाये। एक महिला वकील, जो दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण के पैनल पर है, ने कहा कि हर हाल में अभियुक्तों कानूनी सहायता मुहैया करायी जायेगी।

इस दौरान अदालत परिसर के बाहर भी अभियुक्तों के खिलाफ कुछ महिला वकील नारे लगा रही थीं।
 
 
 
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