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दिल्ली गैंगरेप मामला सबसे अधिक भयानक: सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली, एजेंसी First Published:04-01-13 10:25 PMLast Updated:04-01-13 11:45 PM
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उच्चतम न्यायालय ने 16 दिसंबर को चलती बस में 23 वर्षीय युवती के साथ सामूहिक बलात्कार और नृशंस हत्या की वारदात को हाल के दिनों का सबसे भयानक अपराध बताया है।

न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की खंडपीठ ने मणिपुर में मुठभेड़ में लोगों की कथित हत्याओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली के सामूहिक बलात्कार कांड का जिक्र करते हुये कहा कि आरोपियों पर कानूनी प्रावधानों के अनुरूप मुकदमा चलाना होगा।

मणिपुर में मुठभेड़ों में लोगों को मारे जाने को न्यायोयित ठहराने के राज्य सरकार के प्रयासों पर टिप्पणी करते हुये न्यायाधीशों ने कहा कि हाल के दिनों में यह सबसे भयानक अपराध है, लेकिन ऐसे मामले में भी अभियुक्तों ने जान से नहीं मारा जा सकता है। राज्य सरकार का कहना था कि ये व्यक्ति राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे।

न्यायाधीशों ने राज्य सरकार की इन दलीलों पर कड़ी आपत्ति करते हुये कहा कि इस देश में जब तक यहां हम हैं और कानून का शासन है, हम आरोपियों को गोली मारने की इजाजत नहीं दे सकते।

न्यायाधीशों ने कहा कि मैं आपकी की इस दलील पर कड़ी आपत्ति करता ह्रूं। आप याचिकाकर्ताओं को बगैर किसी सबूत के कैसे राष्ट्र विरोधी कह सकते हैं राष्ट्रवाद पर सिर्फ राज्य का ही एकाधिकार नहीं है। आपको सिर्फ इसलिये इन लोगों को राष्ट्रविरोधी कहने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि आप सरकार हैं। ये आरोप ही है जो लोगों को राष्ट्र विरोधी बनाते हैं।

न्यायालय ने कहा कि उन पर उंगली मत उठाइये। उन्हें राष्ट्रवादी होने का परिचय क्यों देना चाहिए हम सुरक्षाकर्मियों और आम आदमी के निधन पर समान रूप से दुख व्यक्त करते हैं।

न्यायाधीशों ने इसी दौरान दिल्ली के सामूहिक बलात्कार कांड का जिक्र करते हुये वकीलों से कहा कि वे नाबालिग आरोपी के लिये किशोर शब्द का इस्तेमाल नही करें। याचिकाकर्ता ने जब यह दलील दी कि मणिपुर में फर्जी मुठभेड़ में किशोर भी मारा गया तो न्यायालय ने कहा कि किशोर अच्छी व्याख्या नहीं हैं। हमने हाल के मामले में देखा कि किशोर ऐसा अपराध करते हैं। यह सिर्फ एक व्यक्ति है।

आतंकी गतिविधियों पर टिप्पणी करते हुये न्यायाधीशों ने कहा कि इस देश में यह देखना दुर्भाग्यपूर्ण ही है कि प्रधानमंत्री और एक पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या कर दी गयी, लेकिन यह हमें आरोपियों को जान से मारने का अधिकार नहीं देता है।

 
 
 
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