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बलवंत को 31 मार्च को दी जाएगी फांसी, पंजाब गरम
पटियाला, एजेंसी First Published:27-03-2012 04:30:54 PMLast Updated:27-03-2012 11:37:25 PM
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पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के दोषी बलवंत सिंह राजोआना ने मंगलवार को अकाली नेताओं को धोखेबाज करार देते हुए कहा कि वे उसके लिए क्षमादान की मांग नहीं करें। शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंध कमेटी तथा पंजाब सरकार राजोआना की मौत की सजा को माफ करने की वकालत कर रहे हैं।
   
पटियाला की केंद्रीय जेल से लिखे पत्र में उसने कहा कि मुझे नीली पगड़ी वाले अकाली नेताओं से कोई मदद नहीं चाहिए जिन्होंने सिखों को न्याय दिलाने के लिए अभी तक कुछ नहीं किया। अकाली नेताओं ने अब बोलना इसलिए शुरू कर दिया क्योंकि उन्हें डर है कि अगर वे ऐसा नहीं करेंगे तो उन्हें समर्थन नहीं मिलेगा।
   
पत्र की प्रतियां राजोआना की बहन कमलदीप कौर ने केंद्रीय जेल के बाहर बांटी, जहां वह बंद है। राजोआना ने खत में यह भी लिखा है कि अकाली नेता निर्दोष सिखों को दिल्ली से न्याय दिलाने में विफल रहे और अब उन्हें उसे माफी दिलाने के लिए दिल्ली के सामने अपनी पगड़ी उतारने की जरुरत नहीं।
   
राजोआना ने कहा कि अकाली नेता दिल्ली से हाथ जोड़कर मेरे लिए सहानुभूति पाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इतिहास सिखों को न्याय दिलाने में उनकी नाकामी के लिए कभी उन्हें माफ नहीं करेगा।
   
बेअंत सिंह के परिजनों और अमरिंदर सिंह की ओर से समर्थन मिलने के बारे में राजोआना ने कहा कि उनसे मदद नहीं चाहता जो हत्यारों के नुमांइदे हैं।
   
चंडीगढ़ में विशेष सीबीआई अदालत ने राजोआना और जगतार सिंह हवाड़ा को बेअंत सिंह हत्याकांड में एक अगस्त, 2007 को फांसी की सजा सुनाई थी। तीन अन्य को बेअंत सिंह की हत्या की साजिश रचने के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जिनमें लखविंदर सिंह, गुरमीत सिंह और शमशेर सिंह हैं।
   
राजोआना ने न तो फैसले के खिलाफ अपील की और ना ही कोई दया याचिका दाखिल की। हवाड़ा को सुनाई गयी मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया गया था। उसने फैसले के खिलाफ अपील दाखिल की थी।
   
31 अगस्त, 1995 को बेअंत सिंह जब चंडीगढ़ में सचिवालय स्थित अपने दफ्तर से बाहर निकले तो आत्मघाती हमलावर दिलावर सिंह ने उन्हें विस्फोट में मार डाला। घटना में 17 और लोग मारे गये थे। दिलावर के विफल रहने की स्थिति में राजोआना दूसरे मानव बम के तौर पर हमले के लिए तैयार था।

 
 
 
 
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